कलेमेटा में निजी भूमि पर कथित अतिक्रमण, पटवारी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
तहसीलदार के निर्देश के बावजूद दो माह से कार्रवाई लंबित, ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
उत्तम साहू,नगरी। विकासखंड नगरी अंतर्गत ग्राम पंचायत कलेमेटा में निजी भूमि पर कथित अतिक्रमण और पक्का निर्माण किए जाने का मामला अब राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खसरा नंबर 375 की निजी स्वामित्व वाली भूमि पर कथित रूप से कब्जा कर आवास निर्माण किया जा रहा है, लेकिन शिकायत के करीब दो माह बाद भी मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों के अनुसार मामले की शिकायत संबंधित राजस्व अधिकारियों से किए जाने के बाद तहसीलदार द्वारा पटवारी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद ग्रामीणों का दावा है कि निर्देश जारी होने के लंबे समय बाद भी न तो मौके पर कार्रवाई दिखाई दे रही है और न ही मामले का स्पष्ट निराकरण किया गया है।
तहसीलदार के निर्देशों का पालन क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मामले में तहसीलदार स्तर से पटवारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जा चुका है, तो दो माह बीतने के बाद भी कार्रवाई किस स्तर पर अटकी हुई है? ग्रामीणों का आरोप है कि वरिष्ठ राजस्व अधिकारी के निर्देशों के बावजूद पटवारी द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इससे राजस्व अमले की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले में केवल कागजी खानापूर्ति करने के बजाय मौके पर जाकर सीमांकन, स्थल निरीक्षण एवं राजस्व अभिलेखों का सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में निजी भूमि पर अतिक्रमण अथवा बिना अधिकार निर्माण की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
कार्रवाई में देरी से बढ़ रही नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि भूमि विवाद जैसे संवेदनशील मामलों में समय पर जांच और कार्रवाई बेहद जरूरी है। यदि शिकायत के बाद भी महीनों तक मामला लंबित रहता है तो इससे विवाद बढ़ने और ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति अविश्वास पैदा होने की आशंका रहती है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर तहसीलदार के निर्देश के बाद भी पटवारी स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या मामले की जांच वास्तव में की गई या फिर केवल कागजों तक ही कार्रवाई सीमित रह गई? इन सवालों का जवाब राजस्व विभाग को देना चाहिए।
हालांकि, मामले में किसी प्रकार की मिलीभगत या भ्रष्टाचार के आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब वरिष्ठ अधिकारी करेंगे निगरानी?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च राजस्व अधिकारी स्वयं प्रकरण की निगरानी करें, संबंधित पटवारी से जांच और कार्रवाई की स्थिति की जानकारी ली जाए तथा निर्धारित समय-सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत कराई जाए।
फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें राजस्व विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ एक भूमि विवाद का नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी के निर्देशों के पालन और राजस्व प्रशासन की जवाबदेही का भी है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में केवल निर्देश जारी करता है या वास्तव में मौके पर कार्रवाई कर ग्रामीणों को राहत देता है।

