सिंगपुर स्वास्थ्य केंद्र में एक साल से फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन गायब, मरीज परेशान,
कर्मचारियों के लिए आवास भी नहीं,स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
उत्तम साहू
मगरलोड। विकासखंड मगरलोड के वनांचल क्षेत्र में स्थित सिंगपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था ने स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल दी है। यहां पिछले लगभग एक वर्ष से फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन के पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण आसपास के ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में खून जांच जैसी सामान्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। परिणामस्वरूप सिंगपुर सहित आसपास के करीब दो दर्जन गांवों के मरीजों को खून की जांच कराने के लिए करीब 20 किलोमीटर दूर मगरलोड या दुगली जाना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीणों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है, क्योंकि इलाज से पहले ही उन्हें आने-जाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सिंगपुर में पदस्थ फार्मासिस्ट प्रमील कुमार चंद्रवंशी ने अधिकारियों से सेटिंग कर अपनी पदस्थापना मगरलोड मुख्यालय में करा ली है। बताया जा रहा है कि उनका निवास भी मगरलोड में ही है और वहीं उनका स्वयं का मेडिकल स्टोर भी संचालित होता है। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब कर्मचारी की नियुक्ति सिंगपुर में है तो वह मुख्यालय में कैसे पदस्थ है और स्वास्थ्य विभाग इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वनांचल क्षेत्र के लोगों के लिए सिंगपुर स्वास्थ्य केंद्र ही एकमात्र भरोसे का केंद्र है, लेकिन यहां आवश्यक स्टाफ के अभाव में मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
इस संबंध में जब जिला स्वास्थ्य अधिकारी यू.एल कौशिक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं इस मामले में बीएमओ शारदा ठाकुर ने बताया कि फार्मासिस्ट की नियुक्ति के लिए शासन को पत्र लिखा गया है और लैब टेक्नीशियन की पदस्थापना जल्द करने की प्रक्रिया चल रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने का दावा करता है, तो सिंगपुर जैसे स्वास्थ्य केंद्र एक साल से बिना जरूरी स्टाफ के कैसे चल रहे हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी तो यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन बन सकता है। ऐसे में अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर समस्या पर कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है।

