विशेष लेख.. 1 जुलाई राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस

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विशेष लेख.. 1 जुलाई राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस 


धरती के भगवान: बीहड़ों में उम्मीद की सांस, ग्रामीण अंचल की सेहत के सच्चे प्रहरी

सीमित संसाधनों, कठिन परिस्थितियों और अनगिनत चुनौतियों के बीच मानव सेवा का अद्भुत उदाहरण पेश कर रहे हैं नगरी और मगरलोड के चिकित्सक


                पत्रकार उत्तम साहू की कलम से 

नगरी। जब हर रास्ता कठिन हो, अस्पताल दूर हो, बारिश में गांव टापू बन जाते हों और मरीज की हर सांस की कीमत हो, तब डॉक्टर केवल चिकित्सक नहीं रहते—वे उम्मीद, भरोसे और जीवन का दूसरा नाम बन जाते हैं। यही तस्वीर धमतरी जिले के नगरी-सिहावा और मगरलोड अंचल में वर्षों से देखने को मिल रही है, जहां कई चिकित्सक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हजारों लोगों के लिए जीवनदाता बने हुए हैं।

हर वर्ष 1 जुलाई को देशभर में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारत रत्न एवं प्रख्यात चिकित्सक की स्मृति को समर्पित है। यह केवल सम्मान का दिन नहीं, बल्कि उन चिकित्सकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने चिकित्सा को नौकरी नहीं बल्कि मानव सेवा का संकल्प बनाया।

सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व से लगे नगरी-सिहावा के 60 से अधिक गांव आज भी सड़क, मोबाइल नेटवर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। बरसात में कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट जाता है। ऐसे कठिन हालात में सिविल अस्पताल नगरी के डॉ. अरुण नेताम, बेलरगांव के डॉ. एस.के. नाग, साँकरा के डॉ. किशोर साहू और मगरलोड की डॉ. शारदा ठाकुर वर्षों से सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल पेश कर रहे हैं, जिसने ग्रामीणों के दिलों में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत किया है।

25 वर्षों से मातृत्व की सुरक्षा का भरोसा: डॉ. अरुण नेताम



सिविल अस्पताल नगरी के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण नेताम पिछले लगभग 25 वर्षों से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की मजबूत कड़ी बने हुए हैं। उनके नेतृत्व में 20 हजार से अधिक सुरक्षित प्रसव कराए जा चुके हैं। हर महीने औसतन 80 से 100 सामान्य प्रसव और 25 से 30 जटिल सीजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं।

ओडिशा सीमा से लेकर सिहावा के दूरस्थ गांवों तक गर्भवती महिलाओं के लिए उनका नाम भरोसे का पर्याय बन चुका है। अस्पताल के कर्मचारी बताते हैं कि चाहे आधी रात हो, त्योहार हो या अवकाश—एक फोन पर डॉ. नेताम कुछ ही मिनटों में अस्पताल पहुंच जाते हैं। प्रसूति सेवाओं के साथ-साथ वे दुर्घटना, सर्पदंश, बाल रोग और अन्य आपातकालीन मरीजों का भी उपचार करते हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद हर मरीज से मुस्कुराकर मिलना उनकी पहचान बन चुकी है।

जहाँ सड़क भी नहीं थी, वहाँ से शुरू हुई सेवा की यात्रा: डॉ.एस.के. नाग



बेलरगांव के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एस.के. नाग की सेवा यात्रा संघर्ष और समर्पण का जीवंत उदाहरण है। जब उनकी पहली नियुक्ति हुई थी, तब क्षेत्र में सड़क तक नहीं थी। बरसात में गांव कई-कई दिनों तक कट जाते थे और नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण अधिकांश चिकित्सक वहां जाने से कतराते थे। लेकिन डॉ. नाग ने कठिनाइयों के बीच भी सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा।

80 और 90 के दशक में मलेरिया और डायरिया से प्रभावित क्षेत्र में उन्होंने घर-घर जाकर उपचार किया, दवाइयां वितरित कराईं और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक किया। वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने बेलरगांव नहीं छोड़ा। आज भी बेलरगांव, गट्टासिल्ली, जुगदेही, घोटगांव और बस्तर सीमा के अनेक गांवों के लोग उन्हें परिवार का सदस्य मानते हैं। स्वास्थ्य सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति सम्मान तथा राज्य शासन के लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

आठ वर्षों में बदल दी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर: डॉ. किशोर साहू



प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र साँकरा के प्रभारी डॉ. किशोर साहू ने अपने कार्यकाल में एक सामान्य स्वास्थ्य केंद्र को उत्कृष्ट स्वास्थ्य संस्था के रूप में स्थापित कर दिया। जब उन्होंने कार्यभार संभाला, तब अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। आज वही केंद्र स्वच्छता, गुणवत्ता और मरीजों की सुविधाओं के लिए पूरे क्षेत्र में पहचान बना चुका है।

रोजाना 50 से अधिक मरीजों का उपचार, टीबी, मधुमेह, बुखार सहित अनेक बीमारियों का बेहतर इलाज तथा आधुनिक सुविधाओं के कारण दूर-दराज के लोग भी यहाँ पहुंचते हैं। उनके नेतृत्व में स्वास्थ्य केंद्र को 2023 का कायाकल्प पुरस्कार तथा 2025 में राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाणन प्राप्त हुआ। अस्पताल परिसर में स्वच्छता, पेयजल, प्रतीक्षालय और स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों ने इसे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा का आदर्श केंद्र बना दिया है।

नेतृत्व और सेवा का संतुलित उदाहरण: डॉ. शारदा ठाकुर

मगरलोड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. शारदा ठाकुर पिछले 25 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने में जुटी हैं। सीमित संसाधनों और कर्मचारियों की कमी के बावजूद उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में लगातार सुधार हुआ है।

डॉक्टर: इलाज से कहीं बढ़कर विश्वास का नाम

ग्रामीण अंचलों में डॉक्टर केवल दवाइयां नहीं देते, बल्कि भय को भरोसे में बदलते हैं, निराशा में उम्मीद जगाते हैं और संकट की घड़ी में परिवार का सहारा बनते हैं। उनकी सेवा भावना समाज को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त बनाने में अमूल्य योगदान दे रही है।

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर उन सभी चिकित्सकों को शत-शत नमन, जो अपने ज्ञान, संवेदनशीलता और अथक परिश्रम से अनगिनत लोगों के जीवन में नई रोशनी जगा रहे हैं।


"डॉक्टर केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का सबसे पवित्र संकल्प है।"


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