धमतरी..कृषि विभाग में पदस्थापना को लेकर उठे गंभीर सवाल, नियमों की अनदेखी के आरोप से गरमाया मामला
नियम ताक पर,पात्र अधिकारी किनारे, कनिष्ठों को मिली मलाईदार जिम्मेदारी,
वरिष्ठ अधिकारी मौजूद फिर भी ग्राम सेवक बने विकासखंड अधिकारी
उत्तम साहू,धमतरी। जिले के कृषि विभाग में पदस्थापना और प्रभार वितरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग के भीतर ही अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि पात्र अधिकारियों की उपेक्षा कर कनिष्ठ कर्मचारियों को महत्वपूर्ण पदों का प्रभार सौंपा जा रहा है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार कृषि विभाग में कई स्थानों पर ऐसे अधिकारियों को वरिष्ठ पदों का प्रभार दिया गया है, जो नियमानुसार उस पद के लिए पात्र नहीं माने जाते। आरोप है कि ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) को वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) का प्रभार सौंप दिया गया है, जबकि विभाग में कृषि विकास अधिकारी (ADO) उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें जिम्मेदारी नहीं दी गई। इस निर्णय को लेकर विभागीय हलकों में असंतोष देखा जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी का पद विभागीय संरचना में महत्वपूर्ण माना जाता है और सामान्यतः इस पद का प्रभार वरिष्ठता एवं निर्धारित पात्रता के आधार पर दिया जाना चाहिए। ऐसे में कृषि विकास अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को इस पद पर बैठाने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का एक वर्ग इसे सेवा नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था की भावना के विपरीत बता रहा है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। विकासखंड नगरी और कुरूद में भी पदस्थापना को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि जहां वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध हैं, वहां ग्राम सेवक स्तर के कर्मचारियों को विकासखंड कृषि अधिकारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इससे विभागीय पदानुक्रम और कार्यप्रणाली प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
विभाग के जानकारों का कहना है कि यदि पात्र और वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर कनिष्ठ कर्मचारियों को महत्वपूर्ण पदों का प्रभार दिया जाता है तो इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि विभागीय निर्णयों की निष्पक्षता पर भी प्रश्न उठते हैं। कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभाग में प्रशासनिक अनुभव और तकनीकी दक्षता का विशेष महत्व होता है, इसलिए पदस्थापनाओं में पारदर्शिता और नियमों का पालन आवश्यक है।
कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि यदि नियुक्ति और प्रभार वितरण की प्रक्रिया में स्पष्टता नहीं लाई गई तो भविष्य में विवाद और बढ़ सकते हैं। कई कर्मचारियों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रभार वितरण किन आधारों पर किया गया और क्या विभागीय नियमों का पालन किया गया।
जिले के किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का भी मानना है कि विभागीय प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना जरूरी है। कृषि विभाग सीधे किसानों से जुड़ा हुआ है और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक अव्यवस्था का असर योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ सकता है।
अब निगाहें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य स्तर के कृषि प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो संबंधित निर्णयों की समीक्षा कर नियमसम्मत व्यवस्था लागू करने की मांग और तेज हो सकती है।

