1927 का ऐतिहासिक स्कूल आज भी अहाता विहीन
जहां पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पड़े थे कदम, वहां बच्चों की सुरक्षा के लिए पालकों ने खुद संभाली जिम्मेदारी
शासन-प्रशासन की अनदेखी के बीच जनभागीदारी की मिसाल, चंदा जुटाकर कराई कांटेदार तार की घेराबंदी
उत्तम साहू
दुगली/नगरी (धमतरी)। लगभग 99 वर्ष पुराने ब्रिटिशकालीन शासकीय विद्यालय दुगली की तस्वीर आज भी विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। वर्ष 1927 में स्थापित यह ऐतिहासिक विद्यालय, जहां कभी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का आगमन हुआ था, आज तक एक सुरक्षित अहाता (बाउंड्री वॉल) से वंचित है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर बार-बार उठी मांगों के बावजूद जब शासन, प्रशासन और पंचायत से कोई ठोस पहल नहीं हुई तो पालकों ने स्वयं आगे बढ़कर जनसहयोग और चंदे से विद्यालय परिसर की कांटेदार तार से घेराबंदी कर दी।
दुगली गांव अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। ब्रिटिश शासनकाल में यह क्षेत्र प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा। वर्ष 1919 में बना वन विश्राम गृह आज भी यहां की ऐतिहासिक पहचान है। कभी यहां भाप इंजन से संचालित लकड़ी आरा मिल चलती थी और ब्रिटिश काल में स्लीपर परिवहन के लिए रेल सेवा भी संचालित होती थी। इतने समृद्ध इतिहास वाले गांव का यह विद्यालय आज मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
विद्यालय दुगली-मेघा मुख्य मार्ग से लगा हुआ है, जहां चौबीसों घंटे भारी वाहनों का आवागमन रहता है। परिसर खुला होने के कारण स्कूली बच्चों पर हर समय दुर्घटना का खतरा मंडराता है। पालक समिति ने कई बार शासन-प्रशासन और ग्राम पंचायत से अहाता निर्माण की मांग की, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला। पंचायत ने भी बजट और मद के अभाव का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए।
आखिरकार पालकों ने यह तय किया कि बच्चों की सुरक्षा किसी सरकारी फाइल की मोहताज नहीं रहेगी। जनसहयोग और चंदे से राशि एकत्र कर विद्यालय की कांटेदार तार से घेराबंदी कराई गई। यह पहल न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास है, बल्कि समाज की जागरूकता और शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी का भी सशक्त उदाहरण बन गई है।
पालक समिति के अध्यक्ष श्यामाचरण मंडावी और पूर्व अध्यक्ष सूर्य कुमार सलाम ने शासन एवं प्रशासन से मांग की है कि वनांचल क्षेत्र की इस ऐतिहासिक धरोहर विद्यालय के लिए स्थायी बाउंड्री वॉल, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।
हाइलाइट्स
- 1927 में स्थापित ब्रिटिशकालीन शासकीय विद्यालय आज भी अहाता विहीन।
- पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के आगमन का साक्षी रहा है यह विद्यालय।
- मुख्य सड़क से लगे विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा पर लगातार खतरा।
- शासन-प्रशासन से निराश पालकों ने चंदा जुटाकर कराई तारबाड़।
- जनभागीदारी से शिक्षा और सुरक्षा के प्रति समाज ने पेश की अनुकरणीय मिसाल।

