नगरी में सरकारी आवासों पर कब्जे का खेल – पात्र कर्मचारी आवास के लिए दर-दर भटकने को मजबूर

0

 


नगरी में सरकारी आवासों पर कब्जे का खेल – पात्र कर्मचारी आवास के लिए दर-दर भटकने को मजबूर

सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही पर उठ रहे सवाल,? सभी शासकीय आवास की भौतिक सत्यापन करने की मांग 


                    उत्तम साहू दिनांक 6 नवंबर 2025

नगरी/ ब्लॉक मुख्यालय नगरी में शासकीय कर्मचारियों के लिए बनाए गए सरकारी आवासों में मनमानी और नियमों की अनदेखी चरम पर है। प्रशासनिक सुस्ती और विभागीय मिलीभगत के चलते जिन कर्मचारियों को सरकारी मकान का अधिकार है, वे आज आवास के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं, जबकि वर्षों से अपात्र कर्मचारी सरकारी भवनों पर कब्जा जमाए बैठे हैं।  


           विभागवार अनियमितताएं उजागर  

जानकारी के अनुसार नगरी में शिक्षा, राजस्व, वन, कृषि और पंचायत विभागों सहित विभिन्न शासकीय संस्थाओं के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग आवास निर्मित किए गए हैं। इन आवासों में विभागीय कर्मियों को ही रहने की अनुमति रहती है, किंतु वास्तविकता इसके विपरीत है। कई आवासों पर ऐसे कर्मचारी रह रहे हैं जो संबंधित विभाग से नहीं हैं।  


विभागीय सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि कई बार इन कब्जाधारी कर्मचारियों को नोटिस जारी करने के बावजूद मकान खाली नहीं कराए जा सके है। इससे सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।  


 पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में छह साल से गैर-विभागीय कब्जा  


लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कर्मचारी आवासों में अवैध कब्जे का मामला सबसे प्रमुख बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार विभाग की सहमति के बिना एक गैर-विभागीय कर्मचारी पिछले छह वर्षों से आवास पर कब्जा जमाए हुए है। विभाग द्वारा आवश्यक आवास मांगने के बावजूद एसडीएम कार्यालय से किसी प्रकार की कार्रवाई न होने पर विभाग के कर्मचारी नाराज हैं। पत्राचार किए जाने के बाद भी उच्चाधिकारियों द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।  


 देवपुर स्थित जे.डी. कॉलोनी में भी मनमानी आवंटन का आरोप  


इसी तरह देवपुर की जे.डी. कॉलोनी में भी सरकारी आवासों के आवंटन में भारी अनियमितता की शिकायतें हैं। बताया जा रहा है कि यहां पात्र कर्मचारियों से पहले अपात्रों को आवास देकर विभागीय नियमों को नजरअंदाज किया गया है। इससे नए पदस्थ अधिकारी और कर्मचारी किराए के मकान ढूंढने को विवश हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि आवास आवंटन में प्रशासन की मिलीभगत से मनमानी जारी है।  


      कर्मचारियों में बढ़ रहा असंतोष  

आवास को लेकर बढ़ती अनियमितताओं से कर्मचारियों में असंतोष का माहौल है। पात्र कर्मियों का कहना है कि सरकारी आवासों का उद्देश्य कर्मचारियों को सुविधा देना था, किंतु अब यह व्यवस्था कुछ विशेष लोगों के हित साधन का माध्यम बन गई है। कई विभागों ने इस समस्या के समाधान के लिए बार-बार प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।  

सूत्रों के अनुसार कई अधिकारी यह मान रहे हैं कि यदि प्रशासन ने सचेत होकर जल्द कार्रवाई नहीं की तो आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि वे उचित समाधान न मिलने पर सामूहिक प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से जिला स्तर पर आंदोलन का मार्ग अपनाने को विवश होंगे।  


स्थानीय कर्मचारियों और संघ प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी सरकारी आवासों का सत्यापन कर अवैध कब्जेधारियों के विरुद्ध तुरंत कार्रवाई की जाए। साथ ही पात्र कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर आवास आवंटित किया जाए ताकि शासन की नीतियों के अनुरूप पारदर्शिता बनी रहे।  




Post a Comment

0Comments

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !