कोरबा: ग्राम मादन में 20 लाख की सीसी रोड निर्माण पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने जताई भ्रष्टाचार की आशंका
पाली से ज्ञान शंकर तिवारी की रिपोर्ट
कोरबा। शासन द्वारा ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए लाखों रुपये स्वीकृत किए जा रहे हैं, लेकिन कई स्थानों पर इन कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। पाली जनपद अंतर्गत ग्राम मादन में लगभग 20 लाख रुपये की लागत से बन रही सीसी रोड को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में तकनीकी मानकों और स्टीमेट की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार फॉरेस्ट काष्ठागार से मादन बस्ती की ओर जाने वाले मार्ग पर बन रही सीसी रोड में सीमेंट, गिट्टी और रेत का अनुपात नियमों के अनुरूप नहीं रखा जा रहा है, जिससे सड़क की मजबूती पर संदेह बना हुआ है। आरोप है कि सड़क के किनारों पर लगभग 8 इंच मोटाई रखी गई है, जबकि बीच में रेती डालकर केवल 3 से 4 इंच की ढलाई की जा रही है। ऊपर से सीमेंट का घोल डालकर सड़क को बेहतर दिखाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय मजदूरों को नहीं मिला रोजगार
ग्रामीणों ने बताया कि यह कार्य हाथ से कराकर स्थानीय मजदूरों को रोजगार दिया जाना था, लेकिन इसके बजाय मिलर मशीन से सामग्री तैयार कर सड़क बनाई जा रही है। इससे गांव के मजदूरों को काम नहीं मिल पाया है और रोजगारपरक योजनाओं के उद्देश्य पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा निर्माण में पॉलिथीन शीट और वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
सड़क बनने से पहले तोड़ने की तैयारी
हैरानी की बात यह है कि सड़क निर्माण के साथ ही पाइपलाइन डालने के नाम पर कोर कटिंग की तैयारी शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पूरी तरह बनने से पहले ही उसे तोड़ने की योजना सरकारी धन की सीधी बर्बादी है।
सरपंच-सचिव पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव ने कमीशन के लालच में यह कार्य एक अघोषित ठेकेदार को सौंप दिया है। न तो जनप्रतिनिधि और न ही संबंधित अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने पहुंचे हैं, जिससे ठेकेदार मनमानी कर रहा है। ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही, लेकिन अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सीसी की जगह डामर सड़क की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बनी सीसी सड़कें कुछ ही महीनों में उखड़ जाती हैं और धूल उड़ने से स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। ऐसे में उन्होंने सीसी रोड के बजाय डामरीकरण (डामर सड़क) कराने की मांग की है, जिसे वे अधिक टिकाऊ और सुरक्षित मानते हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस मामले की जांच नहीं की गई तो सड़क जल्द ही खराब हो जाएगी। अब सवाल यह उठ रहा है कि जनता के लाखों रुपये किस तरह के विकास कार्यों पर खर्च किए जा रहे हैं। यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है और ग्रामीण पारदर्शी जांच तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


