18 जनवरी नगरी नगर के लिए रहा ऐतिहासिक दिन

0

 18 जनवरी नगरी नगर के लिए रहा ऐतिहासिक दिन


संगवारी कार्यक्रम में एक साथ जुटे श्रृंगीऋषि हाई स्कूल के पूर्व छात्र-छात्राएं

                  नगरी से पत्रकार उत्तम साहू

18 जनवरी का दिन नगरी नगर के इतिहास में एक यादगार और भावनात्मक क्षण के रूप में दर्ज हो गया, जब 1970 से 2010 तक श्रृंगीऋषि हाई स्कूल में अध्ययन करने वाले पूर्व छात्र-छात्राएं “संगवारी कार्यक्रम” के माध्यम से एक मंच पर एकत्र हुए। वर्षों बाद हुई इस आत्मीय भेंट-मुलाकात ने पूरे वातावरण को खुशनुमा, भावुक और यादों से भरा बना दिया।



कार्यक्रम में दूर-दराज क्षेत्रों से आए पूर्व छात्र-छात्राओं ने अपने पुराने सहपाठियों को गले लगाकर बीते दिनों की यादों को ताजा किया। किसी के चेहरे पर मुस्कान थी तो किसी की आंखों में भावुकता—मानो समय की रेत पलटकर फिर से छात्र जीवन में पहुंच गई हो।

कार्यक्रम के दौरान यह पंक्तियां माहौल को और गहराई देती रहीं

“जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मुकाम, वो फिर नहीं आते।”

       शिक्षा की ऐतिहासिक विरासत का साक्षी विद्यालय



उल्लेखनीय है कि आदिवासी विकासखंड नगरी में 70 और 80 के दशक के दौरान पूरे क्षेत्र में केवल श्रृंगीऋषि हाई स्कूल ही एकमात्र ऐसा विद्यालय था, जहां छात्र-छात्राएं ओल्ड मैट्रिक (कक्षा 11) तक शिक्षा प्राप्त करते थे। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें रायपुर जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। सीमित संसाधनों के बावजूद इस विद्यालय ने शिक्षा की ऐसी नींव रखी, जिसने पूरे क्षेत्र को नई दिशा दी।

     उच्च पदों तक पहुंचने वाले विद्यार्थी

इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक छात्र-छात्राएं आगे चलकर पुलिस अधिकारी, प्राध्यापक, लेक्चरर, विधायक, मंत्री, कलेक्टर सहित विभिन्न प्रशासनिक और शासकीय पदों पर पहुंचे। कई लोग आज भी सरकारी सेवाओं में सक्रिय हैं, जबकि सैकड़ों पूर्व विद्यार्थी सेवा निवृत्त होकर समाज को अपने अनुभवों से मार्गदर्शन दे रहे हैं। कुछ छात्राएं प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सेवा केंद्र से जुड़कर मानव जीवन के कल्याण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर राजयोग का अभ्यास एवं शिक्षण करा रही हैं। यह विद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र रहा, बल्कि नेतृत्व और संस्कारों की पाठशाला भी साबित हुआ।

 


    दिवंगत साथियों को दी गई श्रद्धांजलि

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह रहा, जब दिवंगत पूर्व छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान पूरा पंडाल शांति और सम्मान के भाव से भर गया, और कई आंखें नम हो उठीं।

         संगवारी भावना ने जोड़ा दिलों को

संगवारी कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि समय चाहे कितना भी बीत जाए, विद्यालय और सहपाठियों से जुड़ी स्मृतियां कभी पुरानी नहीं होतीं। यह आयोजन न केवल पुनर्मिलन का अवसर था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी—कि शिक्षा, मित्रता और संस्कार जीवनभर साथ चलते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर सभी ने ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने की सहमति जताई, ताकि यह भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव भविष्य में भी बना रहे।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का मंच संचालन एंजिल स्कूल के संचालक बिमलेश मिश्रा और शिक्षिका श्रीमती सुमन गुप्ता के द्वारा किया गया।


जिले के लोकप्रिय वेब पोर्टल दबंग छत्तीसगढ़ीया न्यूज में विज्ञापन के लिए संपर्क करें मो. 7389950798

Post a Comment

0Comments

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !