अष्टभुजी शक्तिपीठ दुर्गा मंदिर उमरगांव में गुप्त नवरात्रि पर दिव्य शतचंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन

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 अष्टभुजी शक्तिपीठ दुर्गा मंदिर उमरगांव में गुप्त नवरात्रि पर दिव्य शतचंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन


उत्तम साहू 

नगरी- उमरगांवअष्टभुजी शक्तिपीठ दुर्गा मंदिर, उमरगांव में गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दिव्य एवं भव्य शतचंडी महायज्ञ का महाआयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक विधि-विधान के साथ किया जा रहा है। यह आयोजन क्षेत्र में आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है, जिसमें दूर-दराज के ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों से माता रानी के असंख्य भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु सहभागिता कर रहे हैं।


इस दिव्य आयोजन के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातःकाल शतचंडी पाठ, तत्पश्चात दोपहर 12:00 बजे से दस महाविद्या पूजन, सतचंडी यज्ञ, महाआरती एवं महाप्रसादी वितरण का आयोजन किया जा रहा है। समस्त धार्मिक अनुष्ठान विद्वान यज्ञाचार्यों के सान्निध्य में पूर्ण वैदिक विधि से संपन्न कराए जा रहे हैं।


मंदिर परिसर में माता दुर्गा के समक्ष भक्तों की आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है, जहाँ 208 मनोकामना तेल ज्योति एवं 8 घृत ज्योति भक्तजनों द्वारा प्रज्वलित की गई हैं। श्रद्धालु यज्ञ में आहुति प्रदान कर माता रानी से सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति, विवाह बाधा निवारण एवं जीवन की विभिन्न समस्याओं से मुक्ति की कामना कर रहे हैं।


इस अवसर पर अष्टभुजी शक्तिपीठ के प्रधानाचार्य द्वारिका प्रसाद पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन विगत 10–11 वर्षों से निरंतर अष्टभुजी शक्तिपीठ दुर्गा मंदिर में संपन्न कराया जा रहा है। यह क्षेत्र का प्रथम एवं विशिष्ट शतचंडी महायज्ञ है, जिसके माध्यम से हजारों भक्तों को प्रत्यक्ष लाभ की अनुभूति हुई है। उन्होंने बताया कि यहाँ अनेक निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त हुआ है, वहीं विवाह में बाधा झेल रहे वर-कन्याओं के विवाह भी सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं।

शतचंडी महायज्ञ की महिमा

शतचंडी महायज्ञ देवी दुर्गा की परम कृपा प्राप्त करने का अत्यंत प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान है। शतचंडी पाठ एवं यज्ञ से,सभी प्रकार की ग्रह-दोष, तंत्र-बाधा एवं नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है,

रोग, शोक, दरिद्रता एवं भय से मुक्ति मिलती है,परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि का वास होता हैभक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है,

दस महाविद्या पूजन की महिमा

दस महाविद्या—काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी एवं कमला—सभी शक्तियों का संयुक्त स्वरूप हैं। इनका पूजन से 

साधक को आत्मिक बल, बुद्धि एवं साहस प्रदान करता है,शत्रु बाधा, न्यायिक एवं मानसिक कष्टों से मुक्ति दिलाता है,साधक के जीवन में उन्नति, सफलता एवं ऐश्वर्य प्रदान करता है

विशेष बसंत पंचमी महोत्सव

आज विशेष रूप से बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर माँ सरस्वती की विधिवत पूजा एवं विशेष हवन आहुति संपन्न कराई गई। बच्चों एवं विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, विद्या एवं बौद्धिक विकास हेतु विशेष आहुतियाँ प्रदान की गईं, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं श्रद्धा का वातावरण बना रहा।


यह आयोजन प्रतिदिन भव्यता के साथ जारी है। आयोजन समिति ने समस्त क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर सतचंडी महायज्ञ में भाग लेने एवं पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है, जिससे सभी को जीवन की बाधाओं एवं समस्याओं से समाधान प्राप्त हो सके।


वनांचल एवं ग्रामीण क्षेत्र में इस प्रकार का भव्य वैदिक आयोजन न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव एवं प्रेरणा का विषय भी है।

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