कुरूद कृषि महाविद्यालय में मोरिंगा परियोजना स्वीकृत, 100 किसानों को उन्नत प्रशिक्षण
धमतरी में सहजन से आय व पोषण सुरक्षा को बढ़ावा, कृषि नवाचार को भी राष्ट्रीय पहचान
उत्तम साहू
धमतरी, 18 फरवरी 2026। जिले के किसानों की आय वृद्धि और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा “मोरिंगा (सहजन) की खेती, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि” विषयक परियोजना स्वीकृत की गई है। यह परियोजना कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुरूद में संचालित होगी, जो इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध है।
परियोजना का नेतृत्व सहायक प्राध्यापक डॉ. पीयूष प्रधान (प्रधान अन्वेषक) करेंगे। एक वर्ष की अवधि वाली इस योजना का क्रियान्वयन प्रौद्योगिकी ग्राम केंद्र सिर्री (जिला धमतरी) और प्रौद्योगिकी ग्राम केंद्र रामपुर (जिला कबीरधाम) में किया जाएगा, जहां प्रत्येक केंद्र पर लगभग 50 किसानों को प्रशिक्षण देकर प्रत्यक्ष लाभान्वित किया जाएगा।
आय और पोषण सुरक्षा पर फोकस
परियोजना के तहत किसानों को मोरिंगा की उन्नत उत्पादन तकनीक, नर्सरी प्रबंधन, वैज्ञानिक कटाई-भंडारण तथा मूल्य संवर्धित उत्पाद बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। सहजन से पाउडर, न्यूट्रीशन सप्लीमेंट, चाय और अन्य खाद्य पूरक उत्पाद तैयार करने की जानकारी देकर किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित किए जाएंगे।
मोरिंगा को पोषक तत्वों से भरपूर “चमत्कारी पौधा” माना जाता है। कम लागत और कम जोखिम वाली यह फसल जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए टिकाऊ विकल्प बन सकती है। परियोजना से कुपोषण उन्मूलन, महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी और ग्रामीण युवाओं के लिए सूक्ष्म उद्यमिता के अवसर भी बढ़ेंगे।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. नवनीत राणा के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना के लिए परिषद ने लगभग 4.95 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं, जिनसे प्रशिक्षण, संसाधन व्यक्तियों का मानदेय और अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी।
कृषि नवाचार को राष्ट्रीय पहचान
इसी क्रम में कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुरूद के प्रोफेसर डॉ. ए. कुरैशी को उनके अभिनव कृषि उपकरण के लिए भारत सरकार द्वारा डिज़ाइन पेटेंट प्रदान किया गया है।
उनकी टीम द्वारा विकसित “ट्री ट्रिमिंग शीयर विद लॉक” उपकरण वृक्षों की छंटाई को अधिक सुरक्षित, आसान और प्रभावी बनाता है। यह विशेष रूप से फलोद्यान एवं बागवानी किसानों के लिए उपयोगी होगा तथा श्रम लागत कम करने के साथ कार्य दक्षता बढ़ाएगा।
अधिष्ठाता डॉ. राणा ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि संस्थान के वैज्ञानिकों के नवाचार कृषि में आधुनिक तकनीक के विस्तार को बढ़ावा देते हैं और भविष्य में भी किसानों की जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान जारी रहेगा।
यह परियोजना और नवाचार जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ किसानों को टिकाऊ खेती, बेहतर पोषण और उन्नत तकनीक की ओर प्रेरित करेंगे।

