भारत माला मुआवजा घोटाला: 43 करोड़ की हेराफेरी में दो राजस्व अफसर गिरफ्तार

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भारत माला मुआवजा घोटाला: 43 करोड़ की हेराफेरी में दो राजस्व अफसर गिरफ्तार



रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत हुए बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईओडब्ल्यू ने डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और तत्कालीन नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण को गिरफ्तार किया है। दोनों पर आरोप है कि इन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों के जरिए शासन को करीब 43 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया।

जांच एजेंसी के मुताबिक, मामला दर्ज होने के बाद दोनों अधिकारी फरार हो गए थे। विशेष टीम ने लगातार निगरानी के बाद 11 फरवरी को उन्हें दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां पूछताछ जारी है। घटना के समय शशिकांत कुर्रे अभनपुर में तहसीलदार पद पर पदस्थ थे, जबकि लखेश्वर प्रसाद किरण गोबरा नवापारा में नायब तहसीलदार थे।

ऐसे रचा गया खेल

ईओडब्ल्यू की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अपराध क्रमांक 30/2025 के तहत भारतीय दंड संहिता की धाराएं 467, 468, 471, 420, 409, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7सी व 12 के तहत प्रकरण दर्ज है। जांच में खुलासा हुआ है कि रायपुर-विशाखापट्नम एवं दुर्ग बायपास सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे में भारी अनियमितता बरती गई।

आरोप है कि अधिकारियों ने अधीनस्थ कर्मचारियों, राजस्व अमले और कथित भूमाफिया के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा। कूटरचित राजस्व अभिलेख तैयार कर प्रभावित भू-स्वामियों को वास्तविक पात्रता से कई गुना अधिक मुआवजा दिलाया गया। इस हेराफेरी से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगी।

जमानत नहीं मिली, कुर्की की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, आरोपियों की जमानत याचिका उच्चतम न्यायालय से भी खारिज हो चुकी है। विशेष न्यायालय पहले ही स्थायी गिरफ्तारी वारंट और उद्घोषणा जारी कर चुका था। अब उनकी संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया भी विचाराधीन है।

मामले की जांच केवल ईओडब्ल्यू तक सीमित नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कथित मनी ट्रेल और वित्तीय लेन-देन की परतें खंगाल रहा है। संभावना है कि पूछताछ में अन्य अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

देश की महत्वाकांक्षी आधारभूत संरचना योजना भारतमाला में इस तरह की अनियमितताओं ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और धन के प्रवाह की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

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