नगरी में प्रतिबंध सिर्फ कागज़ों में, बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा जर्दायुक्त गुटखा

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नगरी में प्रतिबंध सिर्फ कागज़ों में, बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा जर्दायुक्त गुटखा

नगर से गांव तक सप्लाई चेन सक्रिय, प्रशासन मौन, जिम्मेदारों पर उठे सवाल


उत्तम साहू 

नगरी। राज्य में जर्दायुक्त गुटखा पर पूर्ण प्रतिबंध के सरकारी दावे नगरी क्षेत्र में खोखले साबित हो रहे हैं। नगर सहित पूरे अंचल में प्रतिबंधित गुटखा खुलेआम बिक रहा है, और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। थोक व्यापारियों से लेकर पान ठेलों और किराना दुकानों तक इसका नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि प्रतिबंध का असर बाजार में कहीं नजर नहीं आता।


सूत्रों के अनुसार नगरी नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गिने-चुने थोक व्यापारियों के जरिए बड़े पैमाने पर गुटखा सप्लाई किया जा रहा है। वनांचल क्षेत्र में भी लंबे समय से यह अवैध कारोबार बेखौफ जारी है। हालात यह हैं कि प्रतिबंधित जर्दायुक्त गुटखा चोरी-छुपे नहीं बल्कि खुलेआम बेचा जा रहा है। कुछ दुकानदार तो खुले शब्दों में कहते हैं— “जब कंपनियां बना रही हैं, तो बिक्री कैसे रुकेगी?”


क्षेत्र के गांव-गांव और नगर की गली-गली तक पहुंच चुके इस कारोबार ने युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं और यहां तक कि बच्चों को भी इसकी लत की चपेट में ला दिया है। स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माने जाने वाले इस प्रतिबंधित उत्पाद की इतनी आसान उपलब्धता प्रशासनिक निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।


स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों को सब पता होने के बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। पुलिस और खाद्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। छापेमारी और कार्रवाई के दावे जरूर होते हैं, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस बने हुए हैं।


जिला प्रशासन बार-बार प्रतिबंध लागू होने का दावा करता है, मगर बाजार की सच्चाई इन दावों को चुनौती दे रही है। यदि प्रतिबंध के बाद भी करोड़ों का कारोबार निर्बाध चल रहा है, तो सवाल उठना लाजिमी है, क्या कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है?


स्थानीय सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो गुटखे की लत समाज को गंभीर बीमारियों की ओर धकेलती रहेगी।


अब सबसे बड़ा सवाल यही है जब प्रतिबंधित जर्दायुक्त गुटखा खुलेआम बिक रहा है, तो प्रशासन की चुप्पी आखिर किसके हित में है?



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