वनों को आग से बचाने एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित हाईअलर्ट सुरक्षा की जानकारी एसएमएस के माध्यम से मिलेगी

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वनों को आग से बचाने एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित
हाईअलर्ट सुरक्षा की जानकारी एसएमएस के माध्यम से मिलेगी

     वनों की सुरक्षा एवं आग से बचाने दिलाई गई शपथ 



                 उत्तम साहू दिनांक 6 फरवरी 2026

नगरी। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, वनमंडल धमतरी के अंतर्गत नगरी उपमंडल स्तर पर एक दिवसीय अग्नि सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य ग्रीष्मकाल में वनों में लगने वाली आग की घटनाओं को रोकना और जनसहभागिता के माध्यम से वन सुरक्षा को मजबूत करना रहा।

इस जागरूकता कार्यक्रम में प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति के प्रबंधक, पड़ मुंशी, वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान वन अधिकारियों द्वारा वनों को आग से बचाने के उपायों, आग लगने के कारणों तथा उससे होने वाली गंभीर हानियों की विस्तृत जानकारी दी गई।

वनों को अग्नि से सुरक्षा के प्रमुख उपाय

वन अधिकारियों ने बताया कि वन क्षेत्रों की सतत निगरानी अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही आग की रोकथाम के लिए फायर लाइन की अनिवार्य सफाई (3 मीटर, 6 मीटर एवं 12 मीटर चौड़ाई में) समय पर कराई जानी चाहिए।
सूचना तंत्र को सशक्त बनाने के लिए एसएमएस अलर्ट प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, जिससे आग की सूचना तुरंत संबंधित कर्मचारियों और ग्रामीणों तक पहुंच सके।



इसके अलावा फायर ब्लोअर, फायर बीटर एवं अन्य अग्नि नियंत्रण उपकरणों के समुचित उपयोग, मुनादी एवं नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार, फड़मुंशियों और ग्रामीणों को नियमित रूप से जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया।
अधिकारियों ने तेंदूपत्ता एवं महुआ संग्रहण के दौरान वन क्षेत्रों में आग न लगाने और विशेष सतर्कता बरतने की अपील की।

आग लगने के प्रमुख कारण

कार्यशाला में बताया गया कि वनों में आग लगने के मुख्य कारणों में तेंदूपत्ता शाक कर्तन, महुआ फूल संग्रहण, अन्य लघु वनोपज संग्रहण, वन क्षेत्र के समीप खेतों में पराली जलाना, अवैध शिकार के उद्देश्य से आग लगाना तथा जलती हुई बीड़ी या सिगरेट फेंकना शामिल हैं।

आग से होने वाली भारी क्षति

वन अधिकारियों ने आग से होने वाली हानियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे वन उत्पाद नष्ट हो जाते हैं, अप्राकृतिक पुनरुत्पादन प्रभावित होता है और वन्यप्राणियों का आवास क्षेत्र नष्ट हो जाता है। साथ ही जहरीली गैसों एवं CO₂ का उत्सर्जन बढ़ता है, जल स्रोत प्रदूषित होते हैं और भविष्य में पानी की गंभीर कमी उत्पन्न होती है। आग बुझाने एवं पुनरुद्धार कार्यों में शासन को भारी आर्थिक खर्च भी उठाना पड़ता है।

कार्यशाला के अंत में उप वन मंडलाधिकारी ने उपस्थित जनों से अपील की गई कि वे वनों की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी समझें और आग की किसी भी घटना की सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि बहुमूल्य वन संपदा को सुरक्षित रखा जा सके।

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