कर्णेश्वर मेला में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, शौचालय न होने से श्रद्धालु परेशान
उत्तम साहू
सिहावा। सिहावा क्षेत्र स्थित महानदी के उद्गम स्थल के समीप माघ पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला ऐतिहासिक कर्णेश्वर मेला इस वर्ष भी आस्था और श्रद्धा का बड़ा केंद्र बना कर हुआ है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दराज़ के क्षेत्रों से कर्णेश्वर महादेव के दर्शन एवं महानदी संगम में पुण्य स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच मेला क्षेत्र में शौचालय एवं प्रसाधन जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव गंभीर समस्या बन गया है।
मेला परिसर और उसके आसपास अस्थायी या स्थायी शौचालयों की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरन श्रद्धालुओं को खुले में शौच जाना पड़ रहा है, जिससे न केवल असुविधा बढ़ रही है बल्कि स्वच्छता और स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
आस्था के मेले में अव्यवस्था से श्रद्धालुओं में आक्रोश
श्रद्धालुओं का कहना है कि हर वर्ष माघ पूर्णिमा पर कर्णेश्वर मेला लगता है और प्रशासन को भीड़ का पूर्वानुमान रहता है, इसके बावजूद प्रशासनिक लापरवाही समझ से परे है। स्थानीय श्रद्धालुओं और बाहर से आए भक्तों ने बताया कि कई घंटे तक दर्शन एवं स्नान के बाद प्रसाधन सुविधा न मिलने से उन्हें भारी कठिनाई होती है। महिलाओं को तो और भी ज्यादा असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधियों पर उठे सवाल
श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर खासा रोष है कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा इस गंभीर समस्या की अनदेखी की जा रही है। मेला जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं नदारद नजर आ रही हैं।
लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही शौचालय, पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं की गई तो स्थिति और बिगड़ सकती है। खुले में शौच से पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ महानदी उद्गम क्षेत्र की पवित्रता पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
तत्काल व्यवस्था की मांग
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मेला अवधि के दौरान तत्काल अस्थायी शौचालय, मोबाइल टॉयलेट और साफ-सफाई कर्मियों की व्यवस्था की जाए, ताकि आस्था के इस महापर्व में श्रद्धालुओं को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि श्रद्धालुओं की इस जायज मांग पर कब तक संज्ञान लेते हैं, या फिर आस्था का यह विशाल मेला अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ता रहेगा।

