नगरी कालेज की अतिथि व्याख्याता अंबा शुक्ला के फर्जी निवास प्रमाण पत्र को निरस्त करने की अनुशंसा
उत्तम साहू
धमतरी,नगरी/ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निवास प्रमाण पत्र हासिल करने के एक गंभीर मामले में तहसीलदार कार्यालय नगरी द्वारा कड़ा रुख अपनाया गया है। धमतरी जिले के नगरी कालेज में अतिथि व्याख्याता के रूप में कार्यरत अम्बा शुक्ला द्वारा कथित तौर पर कूटरचित तरीके से बनवाए गए स्थानीय निवास प्रमाण पत्र को जांच के बाद निरस्त करने की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता उत्तम साहू (संवाददाता, तरुण छत्तीसगढ़) ने कलेक्टर धमतरी के समक्ष 'जनदर्शन' के माध्यम से एक आवेदन प्रस्तुत किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अम्बा शुक्ला (पिता अखिलेश शुक्ला), जो वर्तमान में शासकीय सुखराम नागे महाविद्यालय नगरी में अतिथि व्याख्याता हैं, उन्होंने तथ्यों को छिपाकर और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर नगरी का निवास प्रमाण पत्र बनवाया है। जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे।
तहसीलदार नगरी द्वारा की गई विस्तृत जांच में निम्नलिखित तथ्य सामने आए हैं:
शिक्षा का स्थान: अनावेदिका अम्बा शुक्ला का जन्म स्थान मध्य प्रदेश (सीधी) है। उनकी प्राथमिक शिक्षा से लेकर स्नातक (B.A.) तक की पढ़ाई वर्ष 2007 तक मध्य प्रदेश में ही हुई है।
निवास की अवधि: छत्तीसगढ़ के नियमानुसार, स्थानीय निवास प्रमाण पत्र हेतु कम से कम 15 वर्ष का निरंतर निवास अनिवार्य है। जांच में पाया गया कि अम्बा शुक्ला वर्ष 2007 के बाद छत्तीसगढ़ आईं। निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन की तिथि (11/08/2019) तक उनका छत्तीसगढ़ में कुल निवास मात्र 13 वर्ष ही था, जो पात्रता की श्रेणी में नहीं आता।
विरोधाभासी जानकारी: अनावेदिका ने अलग-अलग समय पर अपने निवास के अलग-अलग पते (रायपुर और नगरी) दिए, जो जांच के दौरान संदेह के घेरे में आए।
तहसीलदार की अनुशंसा
तहसीलदार नगरी ने अपनी जांच प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 1034/2025) में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि अम्बा शुक्ला द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज स्थानीय निवासी होने की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।
मुख्य निष्कर्ष: अम्बा शुक्ला द्वारा पूर्व में जारी निवास प्रमाण पत्र (क्रमांक 0707011909017238) निरस्त किए जाने योग्य पाया गया है।
इस कार्रवाई से उन लोगों में हड़कंप मच गया है जो दूसरे प्रदेश से आकर और गलत जानकारी देकर सरकारी दस्तावेजों का लाभ उठाते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फर्जीवाड़े के ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

