वन विभाग में फेंसिंग पोल की रहस्यमयी हेराफेरी
एक साल तक पड़े रहे, अब चुपचाप उठवाए जा रहे,भ्रष्टाचार की बू, जांच की उठी मांग
नगरी। वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगरी विकासखंड अंतर्गत वन परिक्षेत्र कार्यालय सांकरा में लगभग एक वर्ष से रखे हजारों फेंसिंग पोल (बल्ली) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यह पोल 132 केवी विद्युत लाइन (नगरी से इंदागांव) के लिए ट्री गार्ड निर्माण हेतु लाए गए थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि एक साल बीत जाने के बावजूद इनका कोई उपयोग नहीं किया गया।
अब अचानक इन फेंसिंग पोल को कार्यालय परिसर से उठाकर कहीं और ले जाया जा रहा है, और जब जिम्मेदार अधिकारियों से पूछा जा रहा है तो स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमोल बातें की जा रही हैं। इससे पूरे मामले में भ्रष्टाचार और शासकीय राशि के दुरुपयोग की आशंका और भी गहराती जा रही है।
हजारों पोल लाए गए, लेकिन इस्तेमाल शून्य
जानकारी के अनुसार, नगरी से इंदागांव तक 132 केवी विद्युत लाइन के दौरान पर्यावरणीय क्षति की भरपाई हेतु ट्री गार्ड लगाने के लिए लकड़ी के हजारों फेंसिंग पोल मंगवाए गए थे, जिन्हें सांकरा वन परिक्षेत्र कार्यालय में डंप कराया गया।
नियमों के अनुसार इन पोलों का समयबद्ध उपयोग होना चाहिए था, लेकिन पूरे एक साल तक वे यूं ही पड़े रहे, जिससे इनके संरक्षण, गुणवत्ता और उद्देश्य पर सवाल खड़े होते हैं।
अब उठान शुरू, लेकिन कहां ले जाया जा रहा—कोई जानकारी नहीं
चौंकाने वाली बात यह है कि अब इन फेंसिंग पोलों को ट्रकों में भरकर वहां से हटाया जा रहा है, लेकिन, इन्हें कहां ले जाया जा रहा है, किस परियोजना या किस कंपार्टमेंट में उपयोग होगा,या केवल किसी अन्य स्थान पर डंप किया जा रहा है, इसकी कोई ठोस जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही।
स्थानीय स्तर पर पूछताछ करने पर भी कोई लिखित आदेश, ट्रांसफर नोट या उपयोग की योजना सामने नहीं आई है।
बार-बार ट्रांसपोर्टिंग से शासन को आर्थिक नुकसान
सूत्रों का कहना है कि पहले इन पोलों को लाने में ट्रांसपोर्टिंग चार्ज दिया गया, फिर एक साल तक अनुपयोगी रखकर अब दोबारा परिवहन कराया जा रहा है, जिससे शासकीय राशि का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है।
यह पूरा घटनाक्रम वित्तीय अनियमितता और लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण प्रतीत होता है।
एसडीओ का बयान—लेकिन अधूरा और अस्पष्ट
जब इस संबंध में एसडीओ नगरी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि “जितनी फेंसिंग की जरूरत थी, वह लगा दी गई है और शेष पोल को बिरगुड़ी परिक्षेत्र के अंतर्गत ले जाया जा रहा है।”
हालांकि, जब उनसे यह पूछा गया कि
- बिरगुड़ी परिक्षेत्र में किस स्थान पर,
- किस कंपार्टमेंट में,
- और किस योजना के तहत फेंसिंग की जाएगी,
तो वे कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।
यह भी नहीं बताया कि पोलों को किस जगह डंप किया जा रहा है, जिससे पूरे मामले में धांधली की आशंका और प्रबल हो गई है।
मिलीभगत की आशंका, उच्च स्तरीय जांच की मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, तो भंडारण से लेकर परिवहन तक, उपयोग न करने की वजह, और अब अचानक उठान के आदेश, जैसे कई बिंदुओं पर अधिकारियों की आपसी मिलीभगत उजागर हो सकती है।
अब यह सवाल उठना लाजमी है कि
क्या यह फेंसिंग पोल किसी अन्य कार्य में गुपचुप खपाने की तैयारी है? या फिर कागजों में उपयोग दिखाकर जमीन पर खेल किया जा रहा है?
वन विभाग की चुप्पी और अस्पष्ट जवाबों ने संदेह को और गहरा कर दिया है। शासन को चाहिए कि इस पूरे मामले की तत्काल जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि जनता के पैसे की लूट पर रोक लग सके।

