इकलौते बेटे के गम ने तोड़ा जीवन का सहारा..महाशिवरात्रि पर माता-पिता ने साथ छोड़ी दुनिया.. पढ़िए पूरी खबर
जांजगीर-चांपा। जिस बेटे को जीवन का आधार मानकर जी रहे थे, उसके जाने के बाद माता-पिता का संसार भी जैसे थम गया। इकलौते पुत्र की सड़क दुर्घटना में मौत का सदमा वे सह नहीं पाए और अंततः महाशिवरात्रि के पावन दिन दोनों ने एक साथ मौत को गले लगा लिया। यह हृदय विदारक घटना जिले के धरदेई गांव की है, जिसने पूरे इलाके को शोक और स्तब्धता में डाल दिया है।
सोमवार सुबह गांव वालों ने 48 वर्षीय कृष्णा पटेल और उनकी पत्नी रमा बाई पटेल को घर के आंगन में पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका देखा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, दोनों को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की और शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। घर से एक सुसाइड नोट और मोबाइल में बनाया गया वीडियो भी बरामद हुआ है।
बताया जा रहा है कि मरने से पहले कृष्णा पटेल ने एक भावुक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उन्होंने अपने बड़े भाइयों से आदित्य के बीमा/क्लेम की राशि दिलाने की बात कही। वहीं सुसाइड नोट में परिजनों से उनकी मौत पर ज्यादा शोक न करने, बल्कि प्रसन्नचित होकर अंतिम संस्कार में शामिल होने की अपील की।
दरअसल, पटेल दंपत्ति का इकलौता बेटा आदित्य पटेल गांव में रहकर माता-पिता की सेवा करता था। 18 अक्टूबर 2025 को वह किसी धार्मिक कार्यक्रम के निमंत्रण और मंदिर निर्माण से जुड़े कार्य के लिए धौराभांठा की ओर गया था। उसी दिन सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत ने माता-पिता को भीतर से तोड़ दिया। वे खुद को ही उसके जाने का जिम्मेदार मानने लगे और धीरे-धीरे दुनिया से विरक्त होते चले गए।
बताया जाता है कि बेटे की याद और अपराधबोध के बोझ में जी रहे दंपत्ति ने महाशिवरात्रि के दिन शिव में लीन होने की भावना के साथ जीवन समाप्त करने का निर्णय लिया और एक ही पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अपने अंतिम पत्र में उन्होंने सभी परिजनों को अभिवादन करते हुए जीवन को हंसते-मुस्कुराते जीने का संदेश दिया है।
इस घटना के बाद गांव में मातम पसरा है। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है, क्या बेटे का गम इतना भारी हो सकता है कि जीवन ही हार मान जाए।

