रागी की खेती से बदली तकदीर: शकुन बाई कुजांम बनीं किसानों के लिए मिसाल

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रागी की खेती से बदली तकदीर: शकुन बाई कुजांम बनीं किसानों के लिए मिसाल


उत्तम साहू 

धमतरी, 3 अप्रैल 2026। धमतरी विकासखंड के ग्राम उरपुटी की कृषक श्रीमती शकुन बाई कुजांम ने लघु धान्य रागी की उन्नत खेती कर सफलता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, लगन और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।

शकुन बाई के पास कुल 7 एकड़ सिंचित कृषि भूमि है, जिसमें वे आधुनिक कृषि उपकरणों जैसे ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, मल्टी क्रॉप थ्रेसर और रीपर की सहायता से खेती करती हैं। उनके परिवार के 5 सदस्य भी खेती में सक्रिय सहयोग देते हैं, जिससे कार्य व्यवस्थित रूप से संचालित होता है।



रबी सीजन में उन्होंने 3 एकड़ में रागी (छत्तीसगढ़ रागी-2) की खेती की। बीजोपचार के लिए बीजामृत और खाद के रूप में वर्मी कम्पोस्ट, डीएपी, पीएसबी एवं केएसबी का उपयोग कर वैज्ञानिक तरीके अपनाए। इसका परिणाम यह रहा कि उन्हें 28.50 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ।

बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत रागी की बिक्री से उन्हें 5200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कुल 1,48,200 रुपये की आय हुई, जबकि कुल लागत मात्र 27,000 रुपये रही। इस प्रकार उन्हें 1,21,200 रुपये का शुद्ध लाभ मिला, जो उनकी उन्नत खेती का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

कृषि विभाग के ‘आत्मा’ (ATMA) कार्यक्रम से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनकी सफलता में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने फसल चक्र परिवर्तन और लघु धान्य फसलों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया। साथ ही, फसल कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन जुताई कर वे भूमि की उर्वरता बनाए रखती हैं।

उनकी इस उपलब्धि की जानकारी मिलने पर कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा स्वयं उनके घर पहुंचे और खेती-किसानी की सराहना की। उन्होंने शकुन बाई को जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक बताया। इस अवसर पर शकुन बाई ने अपनी बाड़ी में उगाए गए मुनगा (सहजन) को भेंट किया तथा पारंपरिक ‘मड़िया पेय’ से अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया, जो ग्रामीण संस्कृति और आत्मनिर्भरता का सुंदर उदाहरण रहा। कार्यक्रम में एसडीएम श्री पीयूष तिवारी सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

शकुन बाई की सफलता यह दर्शाती है कि यदि किसान पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीकों का समन्वय करें, तो कम लागत में अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनकी आर्थिक सुदृढ़ता का आधार बनी है, बल्कि क्षेत्र के किसानों के लिए नई दिशा भी प्रस्तुत कर रही है।

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