नगरी..छह महीने से सूखा पड़ा सोलर नल,शिकायतें भी बेअसर
मोटर निकाल ले गया विभाग, आज तक नहीं लौटी; वनांचल में पेयजल व्यवस्था पर उठे सवाल, ग्रामीण बोले—आखिर कब जागेगा क्रेडा?
उत्तम साहू,नगरी। धमतरी जिले के नगरी विकास खंड के वनांचल क्षेत्र के गांवों में सौर ऊर्जा आधारित पेयजल व्यवस्था किस कदर बदहाल है, इसकी तस्वीर ग्राम पंचायत ठेनही के आश्रित ग्राम तुमडी बहार और बासीन में देखने को मिल रही है। यहां सोलर पंप और नल कनेक्शन करीब छह महीने से बंद पड़े हैं। ग्रामीण शिकायत करते रहे, पंचायत प्रतिनिधि विभाग के चक्कर लगाते रहे और सीएम हेल्पलाइन तक मामला पहुंचा, लेकिन पेयजल संकट जस का तस बना हुआ है।
तुमडी बहार में सोलर पंप लंबे समय से बंद होने के कारण ग्रामीणों को पानी के लिए दूसरे मोहल्लों और वैकल्पिक स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत ठेनही के सभापति दिनेश यादव ने बताया कि सरपंच ज्योति सोम, उपसरपंच रूपेश्वर नाग और भूनेश्वरी यादव सहित पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा लगातार क्रेडा विभाग को समस्या की जानकारी दी गई। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ।
मोटर ले गए, छह महीने बाद भी नहीं लौटाई
बासीन की वार्ड पंच टिकेश्वरी रवि नेताम के मुताबिक करीब छह महीने पहले क्रेडा विभाग के कर्मचारी खराब सोलर पंप की मोटर निकालकर ले गए थे। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि मरम्मत के बाद मोटर जल्द वापस लग जाएगी, लेकिन महीनों गुजरने के बाद भी मोटर वापस नहीं आई। नतीजा यह कि गांव में पेयजल व्यवस्था प्रभावित है और ग्रामीण परेशानी झेल रहे हैं।
शिकायतों का भी नहीं निकला रास्ता
ग्रामीणों का सवाल है कि जब खराबी की जानकारी विभाग को है और मोटर भी विभागीय कर्मचारी निकालकर ले गए हैं, तो फिर छह महीने तक समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ? पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में तकनीकी खराबी आने के बाद महीनों तक सोलर पंप बंद रहना आम समस्या बनती जा रही है।
वनांचल में टेक्नीशियन और अलग शिकायत शाखा की मांग
समस्या को लेकर सभापति दिनेश यादव ने जिला क्रेडा कार्यालय धमतरी पहुंचकर विभागीय अधिकारियों के समक्ष मांग रखी है कि नगरी ब्लॉक के वनांचल क्षेत्र के लिए स्थायी टेक्नीशियन नियुक्त किया जाए। साथ ही सोलर पंप, सौर पैनल और नल कनेक्शन की नियमित देखरेख के लिए नगरी स्तर पर अलग शिकायत शाखा और मेंटेनेंस व्यवस्था शुरू की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि दूरदराज के गांवों में छोटी तकनीकी खराबी भी विभागीय उदासीनता के कारण महीनों की परेशानी में बदल जाती है। अब सवाल सिर्फ तुमडी बाहर और बासीन के दो सोलर पंपों का नहीं, बल्कि वनांचल की पूरी पेयजल व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही का है। ग्रामीणों ने बंद पंपों को तत्काल चालू कराने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने के लिए स्थायी तकनीकी व्यवस्था की मांग की है।

