अगर मन में लगन और उत्साह हो तो सीखने सिखाने की शुरुआत कहीं से भी की जा सकती है
उत्तम साहू नगरी
धमतरी/नगरी- छुट्टी के दिनों में बच्चे बोर ना हो इसलिए स्कूल की शिक्षिका श्रीमती बी.यदू मेडम के द्वारा बच्चों के मनोरंजन हेतु कुछ सीखने सिखाने की चाह में आसपास के स्कूली बच्चों के साथ अलग-अलग तरीकों का खेल खेला गया, बच्चों के इस खेल में..खड्डा लकड़ी मिट्टी व जमीन पर चित्रकारी सहित विभिन्न प्रकार के आकृति,त्रिभुज कोण,आयत वर्ग,आदि किया जा रहा है जिसमे बच्चे उत्साह पूर्वक भाग ले रहे हैं
ऐसे ही नावाचार के माध्यम से मिट्टी के ढेर में अलग-अलग प्रकार से घर बनाना तथा उन घरों में विभिन्न आकृतियों जैसे कोण, त्रिभुज, वृत्त, आयात, आदि की जानकारी बच्चों को दी जा रही है। जिससे बच्चे बहुत ही आनंदित हो कर छुट्टियों का भरपूर उपयोग कर रहे है
शिक्षिका बी.यदु मैडम के द्वारा स्वरचित कविता-नानपन के जमाना....
सच में बच्चों को देखकर अपना बचपन याद आता है
कविता- का राहय वो नानपान के जमाना जेमां खुशी के भंडार राहय,
तितली जैसे उड़त-फिरत चांद ला छुए के चाहत राहय।
स्कूल ले आवन थके-हारे, तबले खेले के लालच राहय।
बिहनिया के कभू सूरत राहय ना, रात के कोनो ठिकाना राहय।
दादी नानी के कहानी मां बेद्रा, भालू, अऊ परी के पसाना राहय।
कतको ठंड, गर्मी, चाहे,पानी गिरे खेले बर मन ललचावत राहय।
रिमझिम रिमझिम पानी गिरे, तबले संगवारी मनसन कागज के नाव चलावत रहे। भोमरा जरे ना सर्दी धरे जम्मो मौसम सुहावत राहय
परिवार के चिंता ना रोय के डर, खुशी,हंसी के ना कोई बहाना राहय।
काश कभु हमन बड़े ना होतेन,
लईका कस मन गदगदावत राहय।
तेकर ले बने तो नानपन के जमाना रहीस,
जेमां खुशी के अड़बड़ खजाना राहय
जेमा खुशी अड़बड़ खजाना राहय।

