रानी अहिल्याबाई होलकर ने अपने साहस और सुशासन का परिचय देकर भारत भूमि को गौरवान्वित किया है.. ठाकुर राम यादव

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रानी अहिल्याबाई होलकर ने अपने साहस और सुशासन का परिचय देकर भारत भूमि को गौरवान्वित किया है.. ठाकुर राम यादव 

 डाईट नगरी में मनाया गया लोकमाता अहिल्याबाई बाई की त्रिशताब्दी जन्म जयंती 


उत्तम साहू, दबंग छत्तीसगढ़िया न्यूज 

नगरी सिहावा/ लोकमाता रानी अहिल्याबाई बाई होल्कर की 300 वीं जयंती पर ब्यख्यान माला का आयोजन किया गया ,इस गरिमामय महती कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विभाग प्रचारक ठाकुर राम यादव,खण्ड कार्यवाहक गोकुल राम देवांगन, जिला अध्यक्ष महेश शर्मा ,खंड अध्य्क्ष आर एल देव,उपाध्यक्ष गण अमिता दुबे,सुषमा आड़ील,,प्राचार्य पी एस राय की उपस्थिति में कार्यक्रम शुभारंभ हुआ, सर्व प्रथम अतिथियों के द्वारा पूजा अर्चना के पश्चात डाईट के बहन निधि कोर्राम ,छाया देवांगन, एवं साथियों के द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत दीपिका कश्यप एवं बहनों के द्वारा किया प्रस्तुत किया गया,तत्पश्चात आयोजन समिति के खंड सचिव अधिवक्ता तुलसी राम साहू ने सभी अतिथियों का परिचय कराया,प्रस्तावना उपाध्यक्ष श्री मति सुषमा आडील ने किया 

इसके पश्चात,पुण्य श्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जीवनी पर वक्तागण अमिता दुबे,राजेश तिवारी,डॉ गोकुल देवांगन, ने किया,मुख्य वक्ता राजिम विभाग के प्रचारक ठाकुर राम यादव ने अहिल्याबाई के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारा इतिहास बहुत प्राचीन और समृद्धि शाली है,जिसे उस समय इतिहास करो ने चाटूकारिता पूर्ण इतिहास लिखे हमारे गौरव को छुपाया गया हर,पूरे हिंदुस्तान में रानी लक्ष्मी बाई,रानी दुर्गावती, रानी अहिल्याबाई होल्कर जैसे वीरांगनाओ ने अपने साहस का परिचय दिया और सुशासन के लोकहित और प्रजा की मूलभूत सुख सुविधाओं को विकसित किया,सड़क कुआ बावड़ी तालाब का निर्माण कराया,किसानों के हित मे लगान माफी के साथ तालाबो और नहरों का निर्माण कराया गरीबो के लिए भोजन शाला,और रोजगार के लिए कपड़ो के उद्योग की शुरुआत आज से 300 साल पहले रानी अहिल्याबाई होल्कर ने मालवा इंदौर ही पूरे हिन्दुस्तान में द्वादश शिवलिंग मंदिरों का जीणोद्धार के साथ,अपनी शिव भक्ति का परिचय अपने राजाज्ञा में ॐ एवम शिव आदेश लिखकर धर्म परायणता का परिचय दिया,, 

नारी शक्ति के सम्मान में महिलाओं की सेना बनाई और अपनी सूझ बूझ और कूटनीति से बिना युद्ध किये जीत गई,उन्होनें कभी अंगेजो के साथ समझौता नही किया ,,आजीवन अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पति ,पुत्र,और ससुर की युद्ध मे वीरगति प्राप्त करने पर नारी होकर मालवा की महारानी बनकर प्रजा की सेवा की और उस समय मे सती प्रथा की समाप्ति की शुरुआत की,हमे उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपना सुंदर भविष्य बनाना है,,इस महती अवसर पर व्यख्याता जोहन नेताम ,निलेश राजा ,अधिवक्ता विजय सिंह ठाकुर,रोवनित सहारे,जी एवम संस्था के छात्रअध्यापक गण उपस्थित रहे ,पूरे कार्यक्रम का संचालन छ ग के सुप्रसिद्ध मंच संचालक प्रदीप जैन बंटी ने किया,इस कार्यक्रम में ,रविवशंकर दुबे,रूपेंद्र साहू ,परमेश्वर सोनबेर, रेखराम साहू,दीपांशु दीवान दायित्व साहू, एवं डाईड नगरी के सभी भैय्या बहन उपस्थित रहे!

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