छत्तीसगढ़ शासन का नया भूमि मूल्यांकन उपबंध — नगरी-चुरियारा क्षेत्र के छोटे किसानों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

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छत्तीसगढ़ शासन का नया भूमि मूल्यांकन उपबंध..नगरी-चुरियारा क्षेत्र के छोटे किसानों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ



उत्तम साहू 

नगरी। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा रजिस्ट्री विभाग के मूल्य निर्धारण से संबंधित नए उपबंध जारी किए जाने से नगरी व आसपास के ग्रामीण अंचल के छोटे किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। शासन ने दिनांक 07 नवम्बर 2025 को जारी आदेश में नगरी, चुरियारा जैसे नगरेत्तर क्षेत्रों के लिए भूमि खरीदी का नया मूल्यांकन नियम लागू किया है, जो ग्रामीण अंचलों में जमीन लेने वालों के लिए “कमर तोड़” साबित हो सकता है।

नए नियम के अनुसार, अब यदि कोई व्यक्ति बीच खार (खेती योग्य क्षेत्र) में भी भूमि खरीदता है तो 35 डिसमिल तक की जमीन का मूल्यांकन “प्लॉट रेट” से किया जाएगा। यदि भूमि 35 डिसमिल से अधिक है तो केवल 35 डिसमिल तक प्लॉट रेट और शेष भूमि का मूल्यांकन खेत रेट पर होगा।

पहले की गाइडलाइन में यह व्यवस्था थी कि यदि भूमि बीच खार क्षेत्र में आती है तो उसका मूल्यांकन खेत रेट पर किया जाता था। वहीं, अन्य स्थानों पर 5 आरे तक पूर्ण मूल्य, 5 आरे से अधिक और 25 डिसमिल तक 25 प्रतिशत मूल्य तथा 25 डिसमिल से अधिक भूमि पर खेत का पूरा रेट लागू होता था।

इसके साथ ही शासन ने हक त्याग रजिस्ट्री पर भी बड़ा बदलाव किया है। पहले चाचा–भतीजा या भुआ–भतीजा जैसे पारिवारिक हस्तांतरण पर केवल 0.8 प्रतिशत रजिस्ट्री फीस ली जाती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे किसान इस निर्णय को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि पहले से ही महंगाई और खेती की लागत बढ़ी हुई है, ऐसे में भूमि खरीदी के नए मूल्यांकन नियम किसानों के लिए जमीन खरीदना कठिन बना देंगे। किसान वर्ग का कहना है कि शासन को इस निर्णय पर पुनर्विचार कर किसानों के हित में राहत देने की आवश्यकता है।

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