शिक्षक ढालूराम का निलंबन समाप्त: फेडरेशन की एकजुटता से बहाल
उत्तम साहू
धमतरी / जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे एक सवाल ने प्रदेशभर में तेज बहस छेड़ दी। कुरूद विकासखंड के सहायक शिक्षक ढालूराम साहू, जिन्हें व्हाट्सऐप स्टेटस में “बच्चों को किताबें मिली नहीं… और हम राज्योत्सव मना रहे” लिखने पर निलंबित कर दिया गया था, अब शिक्षा विभाग ने उन्हें बहाल कर दिया है।
उनकी बहाली केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि शिक्षक समुदाय की एकता, सवाल पूछने के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत के रूप में देखी जा रही है।
किताबों की कमी पर पोस्ट डाली… और सीधे निलंबन
शासकीय नवीन प्राथमिक शाला नारी के सहायक शिक्षक ढालूराम ने जब स्कूलों में किताबों की कमी और व्यवस्थागत खामियों का उल्लेख किया, तो अधिकारियों की नाराजगी इतनी बढ़ी कि शो-कॉज नोटिस पर जवाब देखे बिना ही 3 नवंबर को निलंबन आदेश थमा दिया गया।
यह निर्णय प्रदेशभर के शिक्षकों को खल गया सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि, “क्या अब शिक्षक छात्र हित की बात भी नहीं कर सकते?”
फेडरेशन का अल्टीमेटम के बाद विभाग ने झुकाए कदम
सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन की ब्लॉक, जिला और प्रांतीय इकाइयाँ तुरंत सक्रिय हुईं।
ब्लॉक अध्यक्ष लुकेश राम साहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा: “व्यवस्था की खामियों की ओर ध्यान दिलाना अपराध है, तो यह लोकतंत्र पर हमला है। संघ इस अन्याय को स्वीकार नहीं करेगा।”
प्रांतीय प्रवक्ता हुलेश चंद्राकर, जिलाध्यक्ष दौलत ध्रुव, और अन्य ब्लॉक अध्यक्षों तथा कार्यकर्ताओं ने चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी। लगातार दबाव बढ़ता गया… और अंततः 13 नवंबर को जिला शिक्षा अधिकारी ने ढालूराम का निलंबन समाप्त करते हुए पुनः उसी विद्यालय में पदस्थ कर दिया।
ढालूराम का प्रतिक्रिया—“यह सत्य और एकता की जीत है”
बहाली आदेश मिलते ही शिक्षक ढालूराम ने कहा “मेरे साथ खड़े सभी साथियों के प्रति आभार। यह हमारी सामूहिक शक्ति और सत्य की जीत है।”
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
फेडरेशन ने यह भी कहा कि लड़ाई यहीं खत्म नहीं होती। संघ का कहना है कि “ढालूराम के निलंबन को तो वापस लिया गया, पर जिन्होंने बिना जांच-पड़ताल के पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की, उन पर विभागीय जांच जरूरी है।”
इस मामले ने शिक्षा विभाग के कामकाज, संवादहीनता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल छोड़ दिए हैं।
इस पूरे आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले प्रतिनिधि
हुलेश चंद्राकर, दौलत ध्रुव, लुकेश राम साहू, टेमनलाल साहू, ममता प्रजापति, तेजलाल साहू, तथा सक्रिय पदाधिकारी फालेश्वर कुर्रे, शंकर दास मानिकपुरी, हेमलाल साहू, रामेश्वर साहू, हरिशंकर सेन, खेमचंद देशलहरे, नोहर साहू, प्रकाश चंद साहू, गजानंद सोन, नवीन मारकंडे, भेषज साहू, अभिषेक सिंह, राजेंद्र वर्मा, शिप्रा कन्नोजे, नरेंद्र सिन्हा, भुनेश्वर साहू लगातार ढालूराम के साथ मजबूती से खड़े रहे।
अंततः बड़ा सवाल…
यह पूरा प्रकरण शिक्षा विभाग के लिए एक आईना है
क्या शिक्षक अब वास्तविक समस्याएँ नहीं बताएं?
क्या छात्र हित पर सवाल उठाना अपराध बन गया?
और क्या बिना जांच निलंबन जारी करना विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा है?
ढालूराम की बहाली ने इन सवालों को और भी तेज कर दिया है।
लेकिन फिलहाल—एक शिक्षक की जीत और तंत्र को झकझोरने वाली एकजुटता की कहानी सुर्खियों में है।

