20 साल अंधेरी कोठरी में बंद जिंदगी… और जब सच्चाई बाहर आई तो हर कोई सन्न रह गया

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20 साल अंधेरी कोठरी में बंद जिंदगी… और जब सच्चाई बाहर आई तो हर कोई सन्न रह गया



बस्तर से निकली यह कहानी किसी काल्पनिक उपन्यास की नहीं, बल्कि हमारे समाज की कटु सच्चाई है। एक लड़की—जिसका बचपन, युवावस्था और सपने सब कुछ सिर्फ इसलिए छीन लिया गया क्योंकि घरवालों को डर था कि कोई उसे छेड़ सकता है।

हाँ, आपने सही पढ़ा—सिर्फ शक और डर के नाम पर लड़की को पूरे 20 साल तक अंधेरी कोठरी में बंद रखा गया।

अंधेरा जिसने उसकी दृष्टि छीन ली, और खामोशी जिसने उसके मन को तोड़ दिया

यह घटना बकावंड ब्लॉक की एक बस्ती में रहने वाले एक युवक पर शक के कारण परिवार ने लीसा (परिवर्तित नाम) को कमरे में बंद कर दिया।
कोई खिड़की नहीं, कोई रोशनी नहीं, कोई दोस्त नहीं…
बस चार दीवारें और एक कोठरी, जहां लीसा की उम्र जैसे थम गई।

20 साल तक दुनिया कैसी दिखती है—यह देखने की क्षमता भी वह खो बैठी।

■ 20 साल बाद जब दरवाज़ा खुला

समाज कल्याण विभाग को मामला पता चला, तो अधिकारियों ने युवती को रेस्क्यू कर बाहर निकाला।
सबसे पहले उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया आज लीसा को कोलचूर के आश्रम में रखा गया है,

जहां उसके जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश हो रही है—
शारीरिक भी और मानसिक भी।

■ अब परिवार पर कार्रवाई की तैयारी

प्रशासन ने परिवार से पूछताछ शुरू कर दी है।
कानूनी कार्रवाई की प्रक्रियाएं भी चल रही हैं।
क्योंकि सवाल सिर्फ लीसा का नहीं…
सवाल यह है कि सुरक्षा के नाम पर किसी की जिंदगी, उसकी स्वतंत्रता और उसका भविष्य कौन छीनने का अधिकार रखता है?

■ सबसे बड़ा सवाल

क्या वाकई डर इतना बड़ा हो सकता है कि किसी के जीवन के 20 साल निगल जाए?
या फिर यह घटना इस बात की जीती-जागती मिसाल है कि अज्ञानता और सामाजिक दबाव कितनी खतरनाक शक्ल ले सकते हैं?

लीसा की जिंदगी अंधेरे में बीती…
अब उम्मीद है कि आने वाला समय उसके लिए रोशनी लाए—
भले ही आंखें उसे न देख पाएँ,
लेकिन दुनिया उसे इंसानियत का आसमान जरूर दिखाए।

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