"न्याय की रीढ़ पर खौफनाक हमला, अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश

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 "न्याय की रीढ़ पर खौफनाक हमला, अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश 

फरसाबहार में “अधिवक्ता पर हमला न्यायिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है” अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू

उत्तम साहू 

धमतरी/ फरसाबहार कोर्ट परिसर में मंगलवार दोपहर एक युवक का खूनी तांडव—एक अधिवक्ता पर बोरा सीने वाले नुकीले सूआ से सीधा सिर और आंख पर वार! सौभाग्य से आंख बच गई, वरना जानलेवा साबित हो सकता था। स्टेट बार काउंसिल के दमदार सदस्य अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू ने इसे "न्यायिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार" बताते हुए हाईकोर्ट से लेकर गृह मंत्रालय तक हंगामा मचा दिया है।

सूआ का प्रहार, पुलिस की लापरवाही ?

तपकरा के आयुष चौधरी पेशी पर आया था। बहस गरमाई, तो उसने टेबल से सूआ उठाया और अधिवक्ता चुन्नूराम चौहान पर टूट पड़ा। सहयोगियों ने आरोपी पकड़ा, लेकिन फरसाबहार पुलिस ने BNS की साधारण धाराएं 296, 115(2), 351(2) ही लगाईं। साहू भड़क उठे: "यह हल्का अपराध नहीं, जानलेवा हमला है! साधारण FIR न्याय के साथ खिलवाड़ है। अधिवक्ता समाज की रीढ़ पर वार को बर्दाश्त नहीं!"

गृहमंत्री को पत्र भेजकर की त्वरित कार्रवाई की मांग

साहू ने तत्काल गृहमंत्री को विस्तृत पत्र भेजा—कठोर धाराएं जोड़ो, पुलिस की लापरवाही की जांच करो, कोर्ट परिसरों में सुरक्षा चाक-चौबंद करो! उन्होंने चेताया: "बिलासपुर, रायपुर, सरगुजा में पहले भी हमले हुए, लेकिन सुरक्षा नीति का नाम-ओ-निशान नहीं। अब और नहीं सहेंगे!"

आंदोलन की धमकी, ये हैं प्रमुख मांगें:

- आरोपी पर 'मर्डर अटेम्प्ट' जैसी कड़ी धाराएं लगें  

- पुलिस की FIR लापरवाही की जांच हो  

- कोर्ट कैंपस में CCTV, गार्ड्स और मेटल डिटेक्टर तैनात हों  

- अधिवक्ताओं के लिए राज्यस्तरीय सुरक्षा नीति बने  


अधिवक्ता समाज सड़कों पर उतरने को तैयार। सवाल वही—क्या सरकार जागेगी, या न्याय की रक्षा करने वाले ही असुरक्षित रहेंगे?




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