नया साल, नई शुरुआत: धरने पर बैठी रसोइया माताओं के साथ अमित जोगी ने मनाया नया साल
उत्तम साहू
नवा रायपुर, 1 जनवरी 2026: नया साल जश्न और उत्सव का प्रतीक होता है, लेकिन जेसीसीजे नेता अमित जोगी ने इसे एक अनोखे मानवीय अंदाज में मनाया। उन्होंने नवा रायपुर में धरना दे रही 87,820 रसोइया माताओं के बीच समय बिताया, जो स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन बनाती हैं लेकिन खुद महज 2000 रुपये मासिक वेतन पर गुजारा कर रही हैं।
अमित जोगी अपने परिवार—पत्नी ऋचा और छोटे बेटे आयान—के साथ सुबह धरना स्थल पर पहुंचे। ऋचा ने घर पर ही रसोइया माताओं के लिए पारंपरिक व्यंजन तैयार किए—लाल भाजी, रखिया, पताल के जोझो और टमाटर की चटनी। अमित ने भी खाना बनाने में हाथ बंटाया और धरने पर बैठकर माताओं के साथ भोजन ग्रहण किया।
यह कदम तब लिया गया जब ऋचा की नजर एक खबर पर पड़ी, जिसमें रसोइया माताओं की दयनीय स्थिति का जिक्र था—दिन के 65 रुपये से भी कम मजदूरी। छोटे आयान का मासूम सवाल—"ये आंटी लोग घर क्यों नहीं जा रहीं?"—ने घटना को और भावुक बना दिया।
अमित जोगी ने कहा, "ये महिलाएं सिर्फ रसोइया नहीं, बल्कि हमारे बच्चों की सेहत की पहरेदार हैं। नया साल सम्मान और न्याय के साथ मनाना चाहिए। इनकी मांगें जायज हैं—उचित वेतन और गरिमा।"
रसोइया माताएं लंबे समय से वेतन वृद्धि और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर धरना दे रही हैं। अमित जोगी के इस कदम ने उनकी लड़ाई को नई गति दी है। जेसीसीजे ने वादा किया है कि वे इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे।
नया साल की यह शुरुआत न केवल रसोइया माताओं के लिए आशा की किरण बनी, बल्कि राजनीति में मानवीय संवेदनशीलता का प्रतीक भी।




