धान खरीदी उपार्जन केंद्र पोटापानी में अव्यवस्था, किसानों की परेशानियां बढ़ीं

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धान खरीदी उपार्जन केंद्र पोटापानी में अव्यवस्था, किसानों की परेशानियां बढ़ीं
महिला किसान के धान को लौटाने से भावुक हुआ माहौल, वीडियो वायरल



पाली। धान खरीदी उपार्जन केंद्र पोटापानी में इन दिनों अव्यवस्था और किसानों की परेशानियां लगातार सामने आ रही हैं। केंद्र पर नियम-कायदों के नाम पर किसानों को परेशान किए जाने के आरोप लग रहे हैं। इसी कड़ी में हाल ही में एक ऐसा मार्मिक मामला सामने आया, जिसने न केवल वहां मौजूद किसानों को झकझोर दिया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छेड़ दी।

पाली से ज्ञान शंकर तिवारी की रिपोर्ट के अनुसार, ताजा मामला उस समय सामने आया जब एक महिला किसान की केवल पांच कट्टी धान को उपार्जन केंद्र के प्रबंधन ने सरकारी नियमों का हवाला देते हुए खरीदने से इंकार कर दिया। जैसे ही महिला को यह बताया गया कि उसका धान वापस लौटाया जाएगा, वह भावुक हो गई और मौके पर ही फफक-फफक कर रोने लगी। रोते हुए उसने अपने परिजनों से कहा कि अब धान नहीं बिकेगा और इसे ट्रैक्टर में भरकर घर वापस ले जाना पड़ेगा।

महिला किसान का यह दर्दनाक दृश्य वहां मौजूद अन्य किसानों के लिए भी बेहद पीड़ादायक रहा। कई किसान प्रबंधन से सहानुभूति दिखाने और धान खरीदी की गुहार लगाते नजर आए, लेकिन नियमों का हवाला देकर धान लेने से साफ इनकार कर दिया गया।

इसी दौरान मौके पर मौजूद एक यूट्यूबर ने महिला किसान की पीड़ा और पूरी घटना को कैमरे में कैद कर लिया और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया। वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने कथित तौर पर यह टिप्पणी की कि यदि “हजार रुपये दे दिए होते तो धान खराब नहीं निकलती”, जबकि कई लोगों ने प्रबंधन और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए किसानों के साथ अन्याय होने की बात कही।

उल्लेखनीय है कि धान खरीदी शुरू होने से पहले ही उपार्जन केंद्र के ऑपरेटर हड़ताल पर चले गए थे। ऑपरेटरों की हड़ताल के कारण धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन ने आनन-फानन में वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए नए ऑपरेटरों की नियुक्ति की थी, ताकि खरीदी प्रक्रिया बाधित न हो। हालांकि, लगभग एक सप्ताह बाद पुराने ऑपरेटर अपनी सुरक्षा और मांगों को लेकर हड़ताल समाप्त कर काम पर वापस लौट आए।

इसके बाद से ही कई किसानों ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि उनके धान के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ की जा रही है। किसानों का कहना है कि पहले कभी इस तरह सख्ती से नियम-कानून लागू नहीं किए गए। उनका आरोप है कि ऑपरेटरों की मांगें पूरी न होने के चलते किसानों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है, जिससे सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है।

किसानों का यह भी कहना है कि नियमों की आड़ में उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। कभी धान में नमी का हवाला देकर खरीदी से इंकार कर दिया जाता है, तो कभी गुणवत्ता को लेकर धान लौटा दिया जाता है। इससे किसानों को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि समय और संसाधनों की भी भारी हानि हो रही है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या धान खरीदी केंद्रों पर नियमों का पालन पारदर्शी तरीके से हो रहा है या फिर किसानों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। किसान प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी किसान को इस तरह अपमान और पीड़ा का सामना न करना पड़े।

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