धमतरी में राजस्व विभाग पर फर्जीवाड़े का आरोप: मृतका की जमीन बिना वारिस प्रक्रिया के दूसरे के नाम ट्रांसफर

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 धमतरी में राजस्व विभाग पर फर्जीवाड़े का आरोप: मृतका की जमीन बिना वारिस प्रक्रिया के दूसरे के नाम ट्रांसफर



उत्तम साहू 

धमतरी / छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम भटगांव के एक परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी माता की मृत्यु के बाद कृषि भूमि के कुछ हिस्से को बिना वैधानिक उत्तराधिकार (फौत) प्रक्रिया पूरी किए ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किसी अन्य व्यक्ति के नाम नामांतरण कर दिया गया। पीड़ित परिवार ने इसकी शिकायत जिला कलेक्टर से की है, जिसमें रिकॉर्ड उपलब्ध कराने और जांच की मांग की गई है।


मामले के अनुसार, भटगांव निवासी स्वर्गीय सुखबती साहू के नाम पर खसरा नंबर 1601 (रकबा 0.11 हेक्टेयर) और 1603 (रकबा 0.31 हेक्टेयर) की कृषि भूमि दर्ज थी। वर्ष 2005 में सुखबती की मृत्यु के बाद उनके पुत्र मोहन उर्फ जगदीश साहू ने फौत नामांतरण के लिए आवेदन किया। लेकिन नामांतरण प्रक्रिया में केवल कुछ हिस्से ही वारिसों के नाम हुए, जबकि शेष हिस्से को 'बिक्री' बताकर किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर दिया गया। जगदीश साहू का कहना है कि वर्ष 2003 तक ये खसरे उनकी माता के नाम दर्ज थे, लेकिन 2003-04 के दौरान फर्जीवाड़ा कर नाम बदल दिया गया।


पीड़ित जगदीश साहू ने 29 दिसंबर 2025 को कलेक्टर को सौंपे आवेदन में कहा, "मेरी माता की भूमि को कूटरचित दस्तावेजों से किसी अन्य के नाम कर दिया गया। हमें इस नामांतरण का रिकॉर्ड चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।" आवेदन में बी-1 की छायाप्रति संलग्न की गई है। परिवार का आरोप है कि पटवारी और राजस्व अधिकारियों ने मिलीभगत कर यह फर्जीवाड़ा किया, जिससे उनका आधा हिस्सा 'चोरी' हो गया। दस्तावेज गायब होने या छिपाए जाने की भी शिकायत है।


राजस्व जानकारों, विशेषज्ञों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 109 और 110 के तहत मृतक खाताधार की संपत्ति के उत्तराधिकार में फौत प्रक्रिया अनिवार्य है। वारिसों की उपस्थिति में बंटवारा होना चाहिए और पुत्र-पुत्रियों को समान अधिकार मिलता है। बिना इस प्रक्रिया के नामांतरण या 'बिक्री' दिखाकर ट्रांसफर करना कानून का उल्लंघन है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 467 (दस्तावेज जालसाजी) के अंतर्गत अपराध बनता है।


यह मामला धमतरी जिले में राजस्व विभाग की लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। जिले में पहले भी आदिवासी भूमि ट्रांसफर, भारतमाला प्रोजेक्ट मुआवजा घोटाले और पटवारियों की मनमानी के आरोप लगते रहे हैं। पीड़ित परिवार ने नाम कहा, "शासन के ऑटो-नामांतरण नियमों का दुरुपयोग हो रहा है। पटवारियों का हौसला बढ़ रहा है क्योंकि ऊपर से कोई सख्ती नहीं है।"


जिला प्रशासन ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है, लेकिन जांच के संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप साबित हुए तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले से जिले के अन्य किसानों में भी असंतोष फैल सकता है, क्योंकि भूमि रिकॉर्ड में पारदर्शिता की कमी लंबे समय से शिकायत का विषय रही है।

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