मगरलोड के इंद्रप्रस्थ कीड़ा परिसर की बदहाली पर प्रशासन मौन
गंदगी,नशाखोरी और तोड़फोड़ से जर्जर हुआ स्टेडियम, बड़ी दुर्घटना की आशंका
मगरलोड से उत्तम साहू की रिपोर्ट
नगर पंचायत मगरलोड के अंतर्गत स्थित इंद्रप्रस्थ कीड़ा परिसर इन दिनों जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही और अनदेखी का शिकार बना हुआ है। कभी खेल गतिविधियों और स्वस्थ जीवनशैली का केंद्र रहा यह परिसर आज गंदगी, अव्यवस्था, असामाजिक गतिविधियों और उपेक्षा के कारण बदहाली के कगार पर पहुंच चुका है।
यह वही परिसर है जहाँ नगर के नव निहाल बच्चे देश का भविष्य संवारने के लिए रोजाना अभ्यास करते हैं। कोई फौज में भर्ती होने का सपना लेकर पसीना बहाता है तो कोई खेल के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा देना चाहता है। इसके साथ ही नगर के अनेक नागरिक सुबह-शाम मॉर्निंग वॉक के लिए इसी परिसर पर निर्भर हैं। लेकिन वर्तमान हालात में यह परिसर स्वास्थ्य और सुरक्षा का केंद्र न रहकर खतरे का अड्डा बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार परिसर में चारों ओर गंदगी फैली हुई है, साफ-सफाई का कोई इंतजाम नहीं है। असामाजिक तत्वों द्वारा परिसर में लगातार तोड़फोड़ की जा रही है, कई स्थानों से सामान चोरी हो चुका है और यह क्षेत्र खुलेआम नशा सेवन का अड्डा बन गया है। रात के समय यहां असामाजिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि परिसर की जर्जर स्थिति के बावजूद नगर पंचायत एवं संबंधित विभागों द्वारा न तो नियमित निरीक्षण किया जा रहा है और न ही मरम्मत, सुरक्षा और सफाई की कोई ठोस व्यवस्था की गई है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जब शासन खेलों को बढ़ावा देने और युवाओं को नशे से दूर रखने की बात करता है, तब ऐसे महत्वपूर्ण खेल परिसर की यह दुर्दशा प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है। सवाल यह भी है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कब तक आंख मूंदे बैठे रहेंगे?
नगरवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इंद्रप्रस्थ कीड़ा परिसर की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई हो तथा परिसर का नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। साथ ही नगर की सुंदरता, सुरक्षा और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी चाहिए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेता है या किसी अनहोनी के बाद ही जागता है।


