कांकेर में धर्मांतरित सरपंच पिता के अंतिम संस्कार में भारी बवाल..प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है
डा.बलराम सिंह साहू
कांकेर/भानुप्रतापपुर। छत्तीसगढ़ के बड़े तेवड़ा गांव में एक अंतिम संस्कार ने पूरे गांव को तनाव की आग में झोंक दिया। धर्मांतरित सरपंच के पिता के शव दफन को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक टकराव में बदल गया। गुस्साई भीड़ ने पहले चर्च में तोड़फोड़ की, फिर आग लगा दी और सरपंच के घर को भी निशाना बनाया।
हालात इतने बिगड़े कि आदिवासी समाज और ईसाई समुदाय आमने-सामने आ गए। झड़प को काबू में करने पहुंचे अंतागढ़ के एडिशनल एसपी आशीष बंसोड़ गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस को हालात संभालने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा, लेकिन गांव में तनाव अब भी साफ नजर आ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
गांव के सरपंच रजमन सलाम के पिता चमराराम सलाम की रविवार को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार (कफन-दफन) गांव में ही कर दिया गया। जैसे ही यह बात फैली, ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। पुलिस और प्रशासन ने दोनों पक्षों में सहमति बनाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी।
बुधवार-गुरुवार को बढ़ा बवाल
बुधवार को ग्रामीणों ने शव को कब्र से निकालकर दूसरी जगह अंतिम संस्कार की मांग तेज कर दी। पुलिस की मौजूदगी में झूमाझटकी हुई, जिसमें ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों को चोटें आईं।
गुरुवार को हालात और बिगड़ गए—हजारों ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ सड़कों पर उतर आए। आदिवासी समाज दो हिस्सों में बंट चुका है। एक ओर वे लोग हैं जो धर्मांतरित व्यक्ति के गांव में दफन का विरोध कर रहे हैं, तो दूसरी ओर ईसाई परिवार, जो शव को निकालने देने से इनकार कर रहा है।
प्रशासन का फैसला
भारी विरोध और बिगड़ते हालात के बीच प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए शव को कब्र से बाहर निकालकर गांव से बाहर भेज दिया। गांव में फिलहाल भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन माहौल अब भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
👉 एक अंतिम विदाई, जिसने पूरे गांव को संघर्ष के मोड़ पर ला खड़ा किया—बड़े तेवड़ा में शांति की बहाली अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

