1993–94 बैच के विद्यार्थियों का 30 वर्षों बाद भावुक मिलन

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  1993–94 बैच के विद्यार्थियों का 30 वर्षों बाद भावुक मिलन

शासकीय श्रृंगी ऋषि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, नगरी में हुआ “संग़वारी भेंट मिलन” समारोह


उत्तम साहू 

नगरीसमय की दूरी भले ही बढ़ जाए, लेकिन सच्चे रिश्ते और यादें कभी पुरानी नहीं होतीं। इसी भावना को जीवंत करता हुआ शासकीय श्रृंगी ऋषि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, नगरी के 1993–94 बैच के विद्यार्थियों का 30 वर्षों बाद “संग़वारी भेंट मिलन” समारोह भावनात्मक और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।


तीन दशक पहले एक ही कक्षा में पढ़ने वाले सहपाठी आज जीवन के विभिन्न पड़ावों पर पहुँच चुके हैं। कोई दिल्ली, कोई जबलपुर, कोई मध्यप्रदेश के अलग–अलग अंचलों से, तो कोई देश के अन्य हिस्सों से इस विशेष अवसर पर नगरी पहुँचा। जैसे ही पुराने मित्र एक-दूसरे से मिले, विद्यालय परिसर हँसी, ठहाकों और भावुक क्षणों से गूंज उठा। कई आँखों में खुशी के आँसू थे, तो कई चेहरे मुस्कान से खिल उठे।


विद्यालय का वही प्रांगण, पुरानी कक्षाएँ और स्मृतियों से जुड़ी दीवारें सभी को अतीत में ले गईं। शिक्षकों की सीख, खेल के मैदान की शरारतें, परीक्षा के दिनों की घबराहट और छात्र जीवन की यादें साझा की गईं। साथियों ने अपने संघर्ष, उपलब्धियाँ और अनुभव बताए, जिनमें विद्यालय से मिले संस्कार और आत्मविश्वास की झलक साफ दिखाई दी।


इस अवसर पर यह भी महसूस हुआ कि भौगोलिक दूरियाँ रिश्तों को कमजोर नहीं कर पातीं। 30 वर्षों बाद भी आपसी अपनापन और स्नेह उतना ही गहरा था। यह मिलन समारोह आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश बना कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि जीवनभर साथ निभाने वाले रिश्तों की नींव भी होता है।


समारोह में शामिल सहपाठी:

बलवंत साहू, प्रेमनारायण सिन्हा, ललित गुप्ता, भोजराज साहू, मनीष जैन, संजय भंसाली, चुनूं लाल साहू, लोचन साहू, सुरेश साहू, जसपाल सिंह खनूजा, देवकांत गजपाल, हरवंश मरकाम, हरलाल साहू, गोलू नाहटा, चंद्रशेखर साहू, रोशन तिवारी, अशोक शर्मा, पीतांबर सोम, गजानंद सोन, अभिषेक गुप्ता, उत्तम चोपड़ा, किरण शर्मा, रीता गिरी, अर्चना कौशल, ऋचा वर्मा, वंदना, वैशाली संबेकर, संगीता गिरी, सपना पोरते, पूजा बोथरा, स्वाति भोंसले, नमिता परिहार, शबाना खान, सत्या यादव, चैन चौधरी एवं समता छाजेड़।


अंत में सभी ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर बनाए रखने का संकल्प लिया। यह समारोह स्मृतियों का उत्सव बनकर सभी के दिलों में अमिट छाप छोड़ गया।

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