कर्णेश्वर धाम में उमड़ा शिव भक्ति और आस्था का महासागर
छठवें दिवस शिवमय हुआ सिहावा–नगरी, हर कण में गूंजा “हर-हर महादेव”
उत्तम साहू
नगरी/ देऊरपारा सिहावा स्थित पावन कर्णेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण इन दिनों साक्षात कैलास सा प्रतीत हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक गिरी बापू जी महाराज के दिव्य सान्निध्य में आयोजित 828 वीं श्री शिव महापुराण कथा के छठवें दिवस ऐसा भक्तिमय दृश्य उपस्थित हुआ कि मानो स्वयं देवाधिदेव महादेव अपने भक्तों पर कृपा वर्षा कर रहे हों।
सुबह से ही श्रद्धालुओं की अपार भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी। चारों ओर “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। कथा पंडाल में बैठा हर श्रद्धालु शिवभक्ति के रस में सराबोर दिखाई दिया।
कथा के दौरान जब शिव-पार्वती के भजन गूंजे, तो नन्हे-नन्हे बच्चे भी स्वयं को थिरकने से रोक न सके। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने एक साथ शिव भगवान के गीतों पर झूमते हुए भक्ति की अनुपम छटा बिखेरी।
अपने ओजस्वी और प्रेरणादायी प्रवचन में गिरी बापू जी महाराज ने जीवन का गूढ़ सत्य सरल शब्दों में समझाते हुए कहा—
“जो व्यक्ति केवल कल की चिंता करता है, वह मूर्ख है। जीवन ईश्वर की अनमोल देन है, इसे अच्छे कर्मों, सेवा और समाजहित के कार्यों से सार्थक बनाइए, ताकि आपके जाने के बाद भी लोग आपको स्मरण करें।”
उन्होंने कहा कि सच्चे मन से एक महादेव की आराधना करने से समस्त देवताओं की पूजा का फल प्राप्त हो जाता है, क्योंकि शिव ही सृष्टि के आदि, मध्य और अंत हैं।
कलियुग की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बापू जी ने कहा कि इस युग में कर्म का फल शीघ्र प्राप्त होता है। भगवान शिव और माता लक्ष्मी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि स्थिर भक्ति ही जीवन में सुख-समृद्धि का मूल है।
व्यास जी के वचनों को स्मरण कराते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा—
“जीवन में कभी किसी के साथ कपट न करें, क्योंकि कपट अंततः स्वयं को ही दुख देता है।”
नवयुवाओं को संबोधित करते हुए गिरी बापू जी महाराज ने कर्म और पुरुषार्थ का संदेश देते हुए कहा—
“यदि संसार में कुछ बनना है, तो सुबह की नींद का त्याग करना होगा। जिसने भी इतिहास रचा है, उसने 18 से 20 घंटे तक परिश्रम किया है। संसार में किसी चीज़ की कमी नहीं, कमी है तो केवल मेहनत की।”
उन्होंने श्रद्धालुओं को दर्शन के समय एक विशेष प्रार्थना करने का भी संदेश दिया—
“हे प्रभु, हमारी निर्धनता और अभाव को दूर करें।”
कथा श्रवण के पुण्य अवसर पर पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष नेहरू निषाद, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रकाश बैश, पूर्व विधायक श्रवण मरकाम, प्रदेश महिला मोर्चा सह प्रभारी प्रेमलता नागवंशी, वरिष्ठ नेता रवि दुबे, मोहन नाहटा, विकल गुप्ता, पूर्व जनपद अध्यक्ष दिनेश्वरी नेताम, कमल डागा, प्रतिमा देवांगन, उमा शंकर नागवंशी, सरपंच नरसिंग मरकाम, नागेंद्र बोर्झा, राजेश तिवारी, राजेश गोसाई, रायसर, गोकुल देवांगन सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पंडाल के भीतर ही नहीं, बाहर भी श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ देखने को मिली। छोटे बच्चों से लेकर वृद्धजनों तक, हर आयु वर्ग के भक्त शिवकथा के अमृतपान में लीन दिखाई दिए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आचार्य लक्ष्मी नारायण वैष्णव, वैदिक आचार्य नारायण प्रसाद पाठक, हुपेश पाठक, शिवभक्त मिथिलेश केसरवानी, प्रेरणासंत मुकेश बाबा जी, भानु साहू तथा आयोजन समिति एवं सिहावा-नगरी क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं का सराहनीय योगदान रहा।
छठवें दिवस की कथा ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब भक्ति, विश्वास और शिवकृपा एक साथ मिलती है, तो धरती भी कैलास बन जाती है।
हर-हर महादेव! 🕉️🙏


