खेत से केंद्र तक भरोसा: महिला किसान चैती बाई बनीं धान खरीदी व्यवस्था की पहचान

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खेत से केंद्र तक भरोसा: महिला किसान चैती बाई बनीं धान खरीदी व्यवस्था की पहचान

टोकन से तसल्ली तक—धान खरीदी ने बदली चैती बाई की जिंदगी




         उत्तम साहू,धमतरी, 27 जनवरी 2026।

प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी शुरू होते ही छत्तीसगढ़ के गांवों में किसानों के चेहरे पर संतोष और भरोसे की मुस्कान लौट आई है। शासन की किसान-हितैषी नीतियों का जीवंत उदाहरण बनी हैं धमतरी जिले के ग्राम संबलपुर की महिला किसान श्रीमती चैती बाई साहू, जिनकी कहानी सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की सशक्त तस्वीर पेश करती है।

वर्षों से धान विक्रय की जिम्मेदारी उनके पति निभाते आ रहे थे, लेकिन इस वर्ष स्वास्थ्य खराब होने के कारण चैती बाई ने स्वयं यह दायित्व संभाला। पूर्व निर्धारित तिथि पर कटे टोकन के अनुसार वे 57 क्विंटल धान लेकर खरीदी केंद्र पहुँचीं। पहली बार इतनी बड़ी जिम्मेदारी उठाने के बावजूद उनके चेहरे पर घबराहट नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया।

चैती बाई ने बताया कि धान खरीदी केंद्र की सुव्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था के कारण पूरा कार्य सहजता और सम्मान के साथ संपन्न हुआ। केंद्र में बारदाना, हमाल, डिजिटल तौल मशीन, प्रशिक्षित ऑपरेटर, पेयजल, शौचालय और बिजली जैसी सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध थीं, जिससे किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।

धान विक्रय से प्राप्त राशि से वे अपने पति का बेहतर इलाज कराना चाहती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी के निर्णय को किसानों के लिए बड़ा संबल बताया। उनके अनुसार इस फैसले ने खेती को लाभकारी बनाने के साथ ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान की है।

चैती बाई ने धान खरीदी केंद्र के कर्मचारियों, हमालों और प्रशासनिक अमले की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने संवेदनशीलता और सहयोग की भावना से कार्य किया। उनका मानना है कि बढ़े समर्थन मूल्य से घर के खर्च, इलाज और भविष्य की जरूरतों को लेकर चिंता कम हुई है।

संबलपुर की चैती बाई आज केवल धान बेचने वाली किसान नहीं, बल्कि प्रदेश की किसान-केंद्रित नीतियों की सशक्त पहचान बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह प्रमाण है कि जब शासन की नीतियाँ ईमानदारी और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ धरातल पर उतरती हैं, तो उसका सीधा लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े किसान तक पहुँचता है।


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