प्रशासन की आंखों पर पट्टी या कमीशन का खेल..?

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प्रशासन की आंखों पर पट्टी या कमीशन का खेल..?

नारी–परसट्ठी सड़क निर्माण में खुले आम भ्रष्टाचार, घटिया मटेरियल से बन रही करोड़ों की सड़क



  उत्तम साहू 

धमतरी- मगरलोड / भ्रष्टाचार और अनियमितताएं विकास के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा मानी जाती हैं। एक ओर छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

मगरलोड विकासखंड के ग्राम नारी से परसट्ठी तक लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से बन रही सड़क इन दिनों भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता की मिसाल बनती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत से सड़क निर्माण में घटिया, लोकल और डुप्लीकेट मटेरियल का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है।

      लाल गिट्टी और मलबे से सड़क निर्माण!

ग्रामीणों के अनुसार सड़क के बेस में खराब गुणवत्ता की लाल गिट्टी और मलबा डाला गया है, जो किसी भी मानक पर खरा नहीं उतरता। प्रथम दृष्टया ही सड़क की हालत देखकर गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। करोड़ों की लागत से बन रही यह सड़क कुछ महीनों में ही जवाब दे देगी, ऐसा ग्रामीणों का कहना है।

     शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

इस मामले की शिकायत युवा कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता योगेश साहू द्वारा एसडीओ और कलेक्टर से की गई थी। आरोप है कि शिकायत के बाद जब एसडीओ मौके पर पहुंचे तो दोषपूर्ण बेस मटेरियल को उखाड़ने के बजाय उसी पर ऊपर से ढलाई करवा दी गई, जिससे पूरे मामले को रफादफा करने का प्रयास किया गया।

        ग्रामीणों में भारी आक्रोश

घटना को लेकर ग्राम परसट्ठी में भारी आक्रोश देखने को मिला। सरपंच, उपसरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हुए और एक सुर में मांग की कि— पूरे सड़क निर्माण की उच्च स्तरीय जांच हो,दोषी अधिकारी और ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई की जाए, घटिया सड़क को पूरी तरह उखाड़कर गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए

ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार PWD अधिकारियों और कलेक्टर कार्यालय में शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

       बड़ा सवाल — जनता का पैसा किसके लिए?

सरकार जनता की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन यदि वही पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाए, तो विकास का दावा खोखला नजर आता है। 

सवाल यह है कि— क्या प्रशासन जानबूझकर आंख मूंदे बैठा है?

या फिर यह पूरा मामला कमीशन के खेल का नतीजा है?

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस मामले में सिर्फ जांच के आदेश देती है या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई कर ग्रामीणों को न्याय दिलाती है।

इस संबंध में लोकनिर्माण के जिम्मेदार अधिकारी को विभागीय पक्ष जानने फोन लगाया लेकिन काल रिसिव नहीं किया।





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