कलेक्टर के नेतृत्व में जन-अभियान..फसलचक्र परिवर्तन से जल संरक्षण और कृषि समृद्धि की नई पहचान बन रहा धमतरी

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कलेक्टर के नेतृत्व में जन-अभियान..फसलचक्र परिवर्तन से जल संरक्षण और कृषि समृद्धि की नई पहचान बन रहा धमतरी

धान-प्रधान जिले में कृषि नवाचार की ऐतिहासिक पहल, किसानों की आय बढ़ी, भू-जल को मिला संबल


उत्तम साहू 

धमतरी, 22 जनवरी 2026। धान की परंपरागत खेती के लिए पहचाने जाने वाले रत्नागर्भा जिला धमतरी में अब कृषि नवाचार और जल संरक्षण की नई कहानी लिखी जा रही है। वर्षों से धान-प्रधान खेती पर निर्भर इस जिले में पहली बार बड़े पैमाने पर फसलचक्र परिवर्तन को ज़मीन पर उतारते हुए कम जल मांग वाली, अधिक लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल फसलों को बढ़ावा दिया गया है। नतीजा यह कि तिलहन का रकबा दोगुने से अधिक हो गया, दलहनी फसलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और मूंगफली व सूरजमुखी जैसी नई फसलों की सफल शुरुआत हुई।

यह बदलाव किसी एक योजना का नहीं, बल्कि जिला प्रशासन की सुविचारित रणनीति, सतत निगरानी और किसानों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम है।

कलेक्टर के नेतृत्व में जन-अभियान

इस परिवर्तन की धुरी बने कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा, जिनके नेतृत्व में फसलचक्र परिवर्तन को जन-अभियान का स्वरूप मिला। उन्होंने गांव-गांव जाकर खेतों का निरीक्षण किया, किसानों से सीधा संवाद किया और धान के विकल्प के रूप में दलहन, तिलहन व लघु धान्य फसलों के लाभ समझाए। उनका स्पष्ट संदेश रहा—
“जल संरक्षण के बिना कृषि का भविष्य सुरक्षित नहीं, और फसल विविधीकरण समय की आवश्यकता है।”

कृषि विभाग ने वैज्ञानिक पद्धतियों, उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और बाजार से जुड़ी जानकारी किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई।

जल संकट से समाधान की ओर

प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण होने के बावजूद जिले में लगभग 30 हजार नलकूपों से भू-जल दोहन के कारण जल संकट गहराता जा रहा था। जिले के 1,58,180 कृषक कृषि व्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए किसानों को कम जल मांग वाली रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों की ओर प्रेरित किया गया। इस प्रयास में प्रशासन, जनप्रतिनिधि और आमजन की सहभागिता से जल संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरूकता बनी।

दो चरणों में चला अभियान

फसलचक्र परिवर्तन व जल संरक्षण अभियान दो चरणों में संचालित किया गया—

  • प्रथम चरण (अगस्त–अक्टूबर): जल संकटग्रस्त 85 ग्रामों में अभियान।
  • द्वितीय चरण (नवंबर–दिसंबर): विस्तार कर 201 ग्रामों तक पहुंच।

इस तरह 227 ग्रामों के लगभग 40 हजार कृषक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े। शिविरों में रबी बीज वितरण, बीज उत्पादन पंजीयन और रबी ऋण वितरण सुनिश्चित किया गया।

आंकड़ों में सफलता की तस्वीर

  • 4300 क्विंटल रबी बीज का वितरण
  • 5379 किसानों को 20.54 करोड़ रुपये का ऋण
  • सरसों: 2670 हे. से बढ़कर 5726 हे.
  • मूंगफली: पहली बार 283 हे. (मगरलोड—बुड़ेनी व चंद्रसुर क्लस्टर)
  • सूरजमुखी: पहली बार 100 हे. (गट्टासिल्ली क्लस्टर)
  • रबी दलहन: 21850 हे. से बढ़कर 31500 हे.
  • चना: 15830 हे. से बढ़कर 18179 हे.
  • मक्का: 430 हे. से बढ़कर 1000 हे. से अधिक
  • रागी: 500 हे. में उत्पादन

ये आंकड़े बताते हैं कि किसान अब परंपरागत सोच से आगे बढ़कर लाभकारी और टिकाऊ कृषि की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

आय भी बढ़ी, पर्यावरण भी सशक्त

फसलचक्र परिवर्तन से केवल उत्पादन नहीं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ी, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटी और लागत कम हुई। तिलहन फसलों से बेहतर बाजार मूल्य मिला। कम पानी वाली फसलों ने सिंचाई का दबाव घटाया, भू-जल संरक्षण को बल मिला और पर्यावरण संतुलन मजबूत हुआ।

समर्थन मूल्य से बढ़ा भरोसा

परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए शासन द्वारा प्रथम बार चना की समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई। आगामी खरीदी के लिए भी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जिससे किसानों का भरोसा और मजबूत हुआ है।

अनुकरणीय शासकीय मॉडल

कुल मिलाकर, धमतरी में फसलचक्र परिवर्तन एक सफल शासकीय मॉडल बनकर उभरा है। कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के सतत मार्गदर्शन, प्रशासनिक संकल्प और किसानों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि सही नीति, मजबूत इच्छाशक्ति और जनभागीदारी से जल संरक्षण और कृषि समृद्धि साथ-साथ संभव है। यह पहल न केवल धमतरी, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण बन रही है—जो आने वाले वर्षों में जिले को कृषि नवाचार और सतत विकास का अग्रणी केंद्र बनाएगी।

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