अचानकमार में प्रभुत्व की जंग: युवा बाघ की मौत, जांच में खुला राज

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अचानकमार में प्रभुत्व की जंग: युवा बाघ की मौत, जांच में खुला राज



छत्तीसगढ़ के अचानकमार बाघ अभयारण्य से वन्यजीवन प्रेमियों के लिए एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। अभयारण्य के सारसडोल क्षेत्र में एक दो वर्षीय नर बाघ का शव मिलने से हड़कंप मच गया। शुरुआती आशंकाओं के बाद जब वन विभाग ने गहन जांच कराई, तो मौत की वजह कुदरत की वही कठोर सच्चाई निकली—दो बाघों के बीच हुई क्षेत्रीय लड़ाई।

रविवार को नियमित गश्त के दौरान वनकर्मियों की नजर झाड़ियों के बीच पड़े बाघ के शव पर पड़ी। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अगले दिन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के तहत गठित समिति और पशु चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया।

जांच में सामने आया कि युवा बाघ की गर्दन की हड्डी टूटी हुई थी और गर्दन के निचले हिस्से पर दूसरे नर बाघ के दांतों के गहरे निशान थे। इसके अलावा घटनास्थल पर संघर्ष के कई सबूत मिले—टूटी डालियां, जमीन पर खरोंच के निशान, बिखरे बाल और मृत बाघ के पंजों में फंसे दूसरे बाघ के बाल। इन सबने यह साफ कर दिया कि यह मौत शिकार या तस्करी नहीं, बल्कि प्रभुत्व की लड़ाई का नतीजा थी। राहत की बात यह रही कि बाघ के सभी अंग सुरक्षित पाए गए।

वन विभाग ने बताया कि लड़ाई में शामिल दूसरे बाघ की पहचान कर ली गई है और उस पर कैमरा ट्रैप व फील्ड ट्रैकिंग के जरिए लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि भविष्य में किसी तरह का खतरा न हो। पोस्टमार्टम के बाद समिति की मौजूदगी में शव का विधिवत अंतिम संस्कार किया गया, जबकि आंतरिक अंगों को लैब जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।

अधिकारियों के अनुसार, अचानकमार में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बेहतर आवास, सुरक्षित कॉरिडोर और कान्हा–बांधवगढ़ क्षेत्र से प्राकृतिक प्रवासन के चलते क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। यही वजह है कि अब ऐसे आपसी संघर्ष अक्सर देखने को मिल रहे हैं। फिलहाल अचानकमार अभयारण्य में करीब 18 बाघ मौजूद हैं।

आंकड़े भी इसी कहानी को बयां करते हैं। सितंबर 2025 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में बीते तीन वर्षों में बाघों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है—2022 में 17 से बढ़कर अप्रैल 2025 तक 35। इंद्रावती, उदंती-सीतानदी, अचानकमार और गुरु घासीदास–तमोर पिंगला अभयारण्य इस सफलता के अहम केंद्र बनकर उभरे हैं।

यह घटना भले ही दुखद हो, लेकिन यह भी बताती है कि जंगल में बाघों की वापसी मजबूत हो रही है—जहां जीवन के साथ संघर्ष भी स्वाभाविक है। 🐅🌿

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