दो माह से ठप जल जीवन मिशन का काम, ठेकेदार की लापरवाही से करोड़ों की योजना पर संकट

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दो माह से ठप जल जीवन मिशन का काम, ठेकेदार की लापरवाही से करोड़ों की योजना पर संकट

खुले में जंग खाता सरिया, अधूरा ढांचा और बकाया मजदूरी—घटुला में सवालों के घेरे में ठेकेदार



उत्तम साहू 

नगरी। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के तहत “हर घर जल” का सपना साकार करने के दावे तो बड़े-बड़े किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। नगरी विकासखंड के घटुला गांव में चल रहा निर्माण कार्य बीते दो माह से ठप पड़ा है, जिससे न केवल योजना की रफ्तार पर ब्रेक लगा है, बल्कि ठेकेदार की कार्यप्रणाली भी कठघरे में आ गई है।

सरिया बिछाकर छोड़ दिया काम, गुणवत्ता पर बड़ा सवाल

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो माह पहले निर्माण स्थल पर सरिया बिछाने के बाद ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ दिया। तब से न तो मजदूर नजर आए और न ही कोई निर्माण गतिविधि। खुले में पड़ा सरिया अब जंग पकड़ने लगा है, जो भविष्य में बनने वाले ढांचे की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जानकारों का कहना है कि यदि जंग लगे सरिए का उपयोग किया गया, तो यह सार्वजनिक सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ होगा।

सूचना बोर्ड गायब, पारदर्शिता पर संदेह

निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड का अभाव भी कई सवालों को जन्म दे रहा है। न तो परियोजना की लागत स्पष्ट है, न कार्य की समय-सीमा और न ही ठेकेदार का नाम। इससे यह आशंका गहराती है कि कहीं नियमों और मापदंडों को ताक पर रखकर काम तो नहीं किया जा रहा।

मजदूरों का दर्द: काम कराया, पैसा नहीं मिला

ठेकेदार की कार्यशैली पर सबसे गंभीर आरोप मजदूरों ने लगाए हैं।
मजदूरों का कहना है कि करीब छह माह पहले 7–8 मजदूरों से काम कराया गया, लेकिन अब तक प्रति मजदूर 8,000 रुपये से अधिक की मजदूरी बकाया है। भुगतान के लिए कई बार गुहार लगाई गई, अधिकारियों तक भी शिकायत पहुंची, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
मजदूरों का सवाल है—“अगर सरकारी योजना में काम करने के बाद भी मजदूरी नहीं मिलेगी, तो जिम्मेदार कौन?”

करोड़ों की योजना, लेकिन रफ्तार बेहद धीमी

सांकरा समूह जल आपूर्ति योजना के तहत घटुला सहित 36 गांवों को जोड़ने का लक्ष्य है, जिससे लगभग 29,458 घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाना है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद घटुला क्षेत्र में काम की प्रगति बेहद धीमी बताई जा रही है, जिससे प्रशासनिक निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।

अधिकारी बोले—काम शुरू होगा, भुगतान हो चुका

साइड इंजीनियर पवन कुमार ने दावा किया कि निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा और सूचना बोर्ड लगाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों का भुगतान किया जा चुका है।
वहीं पीएचई एसडीओ ठाकुर का कहना है कि ठेकेदार को धीमी प्रगति को लेकर निर्देश दिए गए हैं।

ग्रामीणों की मांग—जांच हो, जिम्मेदारी तय हो

स्थानीय लोगों की मांग है कि उच्च अधिकारी तत्काल स्थल निरीक्षण करें,

  • जंग लगे सरिए की गुणवत्ता जांच हो
  • मजदूरों के भुगतान की सच्चाई सामने आए
  • और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की जाए

ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर भी सफल दिखना चाहिए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो न सिर्फ सार्वजनिक धन की बर्बादी होगी, बल्कि भविष्य में किसी बड़े हादसे से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर कब तक आंखें खोलता है, या फिर “हर घर जल” का सपना घटुला में यूं ही अधूरा पड़ा रहेगा।

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