“सीमा पर तैनात सैनिकों के परिवार पर गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी का वहशी हमला: यह FIR नहीं, न्याय की हत्या है” अमित जोगी
रांवा के सैनिक परिवार से मिलकर दोषियों पर कड़ी धाराओं में FIR दर्ज.. करने की मांग
राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर अमित जोगी का तीखा हमला
उत्तम साहू
धमतरी/ छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने धमतरी जिले के ग्राम रांवा में सैनिकों के परिवार पर हुए बर्बर हमले को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। रांवा (धमतरी) में पीड़ित साहू परिवार से मुलाकात के बाद अमित जोगी ने कहा कि “यह कोई साधारण मामला नहीं, बल्कि कानून और संविधान की खुलेआम हत्या है।”
अमित जोगी ने बताया कि बलराम साहू के दोनों बेटे नोहर साहू और लिलेश्वर साहू भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में उधमपुर और बीकानेर में सीमा पर देश की सेवा कर रहे हैं। इसी दौरान उनके पिता और भाई सतीश व वेदप्रकाश सभी वैध लाइसेंस और कानूनी अनुमति के साथ नवजात बछड़ों को आश्रय दिलाने का कार्य कर रहे थे।
गोरक्षा के नाम पर भीड़ का कहर
अमित जोगी के अनुसार 6 जनवरी की रात, करहीभदर (गुरूर) जाते समय करीब 25 लोगों की भीड़ ने साहू परिवार को रोका, लूटा और लोहे की रॉड, बेल्ट व जूतों से बेरहमी से पीटा। पीड़ितों को अधमरी हालत में सड़क पर छोड़ दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमानवीयता की पराकाष्ठा तब हुई जब तथाकथित “शुद्धिकरण” के नाम पर पीड़ितों पर सार्वजनिक रूप से पेशाब किया गया।
हल्की धाराओं में FIR, आरोपी ज़मानत पर बाहर
अमित जोगी ने गुरूर पुलिस द्वारा दर्ज FIR पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इतने जघन्य अपराध के बावजूद केवल BNS 126(2), BNS 296 और BNS 3(5) जैसी हल्की व ज़मानती धाराएं लगाई गईं, जिससे सभी आरोपी आसानी से ज़मानत पर बाहर आ गए।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “यदि यह औपचारिकता ही निभानी थी, तो अपराधियों को माला पहनाकर सम्मानित कर देते। सैनिकों के परिवार के साथ इससे बड़ा मज़ाक नहीं हो सकता।”
अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई का ऐलान
अमित जोगी ने ऐलान किया कि वे स्वयं इस मामले में गंभीर गैर-ज़मानती धाराएं जोड़वाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने BNS 109/115(2) (हत्या के इरादे से जानलेवा हमला), BNS 309/304 (डकैती) और BNS 103 सहपठित 3(5) (मॉब लिंचिंग/सामूहिक हिंसा) लगाने की मांग की है।
साथ ही उन्होंने सभी आरोपियों की ज़मानत रद्द कराने के लिए बालोद न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कही।
‘देश सैनिकों से चलता है, भीड़तंत्र से नहीं’
अमित जोगी ने इस घटना को ज़ेनोफोबिक विजिलांटिज़्म करार देते हुए कहा कि नफ़रत से भरी भीड़ जब कानून अपने हाथ में ले लेती है और सत्ता मूकदर्शक बन जाती है, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है।
उन्होंने दो टूक कहा, “देश सैनिकों से चलता है, भीड़तंत्र से नहीं। डर से नहीं, न्याय से देश चलता है।”
घटना के बाद प्रदेश में गुस्सा बढ़ता जा रहा है और साहू परिवार को न्याय दिलाने की मांग तेज़ हो गई है। यह मामला एक बार फिर छत्तीसगढ़ में मॉब लिंचिंग और विजिलांटिज़्म के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करता है।




