नक्सलवाद पर करारा वार: सुकमा में 22 माओवादी मुख्यधारा में लौटे, एक महिला भी शामिल
सुकमा। बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान को सोमवार को बड़ी कामयाबी मिली, जब जिले में सक्रिय 22 माओवादियों ने हथियार छोड़कर सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वालों में एक महिला माओवादी भी शामिल है, जिससे इस अभियान को सामाजिक स्तर पर भी अहम सफलता माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी राज्य सरकार की “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025” और “पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान से प्रभावित हुए। अंदरूनी इलाकों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सड़क संपर्क में सुधार और शासन की योजनाओं की बढ़ती पहुंच से संगठन की पकड़ कमजोर पड़ती जा रही है।
17 फरवरी 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में डीआईजी सीआरपीएफ रेंज जगदलपुर एस. अस्ल कुमार, आईपीएस अधिकारी रोहित शाह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑप्स) तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा सहित सीआरपीएफ और कोबरा वाहिनी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी के सामने माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया।
इस आत्मसमर्पण को सफल बनाने में डीआरजी सुकमा, जिला पुलिस बल, रेंज फील्ड टीम जगदलपुर, सीआरपीएफ की 02, 111, 223, 227 वाहिनी तथा कोबरा-201 वाहिनी की आसूचना शाखा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को तत्काल 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई है। साथ ही उन्हें रोजगार, प्रशिक्षण और पुनर्वास से जुड़ी अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे सामान्य जीवन की नई शुरुआत कर सकें।

