खबर का असर: धारा 89-115 की अनदेखी से सही सुधार की ओर बढ़ा राजस्व अमला

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 खबर का असर: धारा 89-115 की अनदेखी से सही सुधार की ओर बढ़ा राजस्व अमला

बेलरगांव तहसील बनी मिसाल, जिलेभर में दिखने लगा सकारात्मक असर



उत्तम साहू 

धमतरी/बेलरगांव। भूमि अभिलेखों में वर्षों से चली आ रही प्रक्रियागत त्रुटियों के सुधार की दिशा में बेलरगांव तहसील से एक सकारात्मक और उदाहरणीय पहल सामने आई है। धारा 89 के स्थान पर सही कानूनी प्रावधान धारा 115 के तहत सुधार आदेश पारित किए जाने से न केवल दो लंबित प्रकरणों का समाधान हुआ, बल्कि इसका असर अब पूरे जिले में देखने को मिल रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम करैहा निवासी रेखूराम पिता रामसिंग ने तहसीलदार न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर खसरा नंबर 67/3 एवं 502/3 में अपने पिता रामसिंग के स्थान पर गलती से सुकलाल का नाम दर्ज होने की शिकायत की थी। इसी प्रकार ग्राम गढ़डोंगरी माल निवासी ठाकेश्वर पिता घनश्याम ने खसरा नंबर 548 में 0.40 हेक्टेयर भूमि अन्य व्यक्ति के नाम तथा 0.06 हेक्टेयर भूमि भुईयां के रूप में ऑनलाइन अभिलेख में प्रदर्शित होने पर आपत्ति दर्ज कर सुधार की मांग की थी।

प्रारंभिक रूप से दोनों प्रकरणों को तहसीलदार द्वारा बंदोबस्त त्रुटि सुधार की धारा 89 (शीर्ष ‘अ’-5) में दर्ज कर सुनवाई प्रारंभ की गई। किंतु छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 89-115 (पार्ट-1 एवं पार्ट-2) के प्रावधानों तथा इस विषय पर प्रकाशित समाचारों के प्रसार का तत्काल असर देखने को मिला।

खबर के संज्ञान में आते ही तहसीलदार ने पहल करते हुए यह स्वीकार किया कि उक्त प्रकरण धारा 115 (शीर्ष ‘अ’-6-अ) के अंतर्गत आते हैं। इसके पश्चात पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक के प्रतिवेदन के आधार पर प्रकरणों को सही धारा में स्थानांतरित कर सुधार आदेश पारित किए गए

राजस्व जानकारों के अनुसार, अब तक कई तहसीलों में त्रुटिवश या सुविधा की दृष्टि से गलत धारा 89 के तहत आदेश पारित किए जाते रहे हैं, जिससे प्रकरण जटिल होते थे, अपीलों की संख्या बढ़ती थी और अनावश्यक देरी व भ्रष्टाचार की आशंका बनी रहती थी। बेलरगांव तहसील में हुई इस कार्रवाई ने इस परंपरा को तोड़ते हुए सही कानूनी प्रक्रिया अपनाने की दिशा में ठोस संकेत दिया है।

इस सुधार का सीधा लाभ आवेदकों को मिला है

  • प्रकरणों का त्वरित निराकरण,
  • कम कागजी औपचारिकताएं,
  • और अधिक पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया

बेलरगांव तहसील से शुरू हुई यह सकारात्मक पहल यदि अन्य तहसीलों में भी अपनाई जाती है, तो जिले में भूमि अभिलेख सुधार की प्रक्रिया अधिक सुचारू, निष्पक्ष और भरोसेमंद बन सकेगी। इससे भू-स्वामियों के अधिकार सुरक्षित होंगे और राजस्व व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

कुल मिलाकर, धारा 89-115 को लेकर प्रकाशित खबर ने न केवल दो प्रकरणों को सही ट्रैक पर लाया, बल्कि पूरे जिले में सही प्रक्रिया अपनाने की एक मजबूत मिसाल भी कायम की है।


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