ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में 90 वीं शिव जयंती हर्षोल्लास से मनाई गई
शांति, आध्यात्म और ईश्वरीय चेतना से सराबोर रहा आयोजन
उत्तम साहू
नगरी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में 90वीं शिव जयंती का पर्व बड़े ही श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह पावन आयोजन नगर पंचायत नगरी के अध्यक्ष श्री बलजीत छाबड़ा एवं पार्षद श्रीमती चेलेश्वरी साहू के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत पूर्णतः शांति, आध्यात्मिकता और ईश्वरीय वातावरण के बीच हुई। इस अवसर पर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी भावना बहन, ब्रह्माकुमारी कमलेश्वरी बहन, संस्था के सभी भाई-बहन तथा नगर के अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
पावन अवसर पर अतिथियों द्वारा शिवलिंग पर माल्यार्पण कर पूजा-अर्चना की गई। तत्पश्चात नगर पंचायत अध्यक्ष श्री बलजीत छाबड़ा द्वारा शिव ध्वज फहराया गया तथा शिव जयंती की स्मृति में केक काटकर उत्सव मनाया गया।
सभा को संबोधित करते हुए राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी भावना बहन ने सभी को 90वीं शिव जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महाशिवरात्रि परमपिता शिव परमात्मा के दिव्य अवतरण का स्मरणीय दिवस है। शिव का अर्थ ही है—परोपकारी और कल्याणकारी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब संपूर्ण विश्व दुख, चिंता और अशांति से ग्रसित है, ऐसे समय में परमपिता शिव परमात्मा शांति, सुख और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतरित होते हैं। आज के तनावपूर्ण वातावरण में मानव आत्मा को सच्ची शांति और शक्ति केवल परमात्मा शिव की स्मृति और उनके दिव्य संदेश से ही प्राप्त हो सकती है। अंत में उन्होंने सभी को सात्विक जीवन की प्रतिज्ञा भी दिलाई।
मुख्य अतिथि श्री बलजीत छाबड़ा ने महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हमें परमपिता शिव से जुड़ने और उनके गुणों को अपने जीवन में धारण करने का अवसर प्रदान करता है। परमात्मा शिव के ज्ञान से मन को शीतलता, शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
वहीं श्रीमती चेलेश्वरी साहू ने भी शिव जयंती की बधाई देते हुए कहा कि परमपिता शिव परमात्मा की याद से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कार्यक्रम के अंत में ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा अतिथियों को ईश्वरीय प्रतीक चिन्ह भेंट किए गए तथा सभी उपस्थितजनों ने ईश्वरीय प्रसाद ग्रहण किया। संपूर्ण आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।



