गणित और विज्ञान शिक्षा को सुदृढ़ करने IISER पुणे में धमतरी के शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण

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 गणित और विज्ञान शिक्षा को सुदृढ़ करने IISER पुणे में धमतरी के शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण


उत्तम साहू 

धमतरी: गणित एवं विज्ञान शिक्षण की गुणवत्ता को और अधिक बेहतर बनाने के उद्देश्य से भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) पुणे में राष्ट्रीय स्तर का तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में धमतरी जिले के प्रतिष्ठित शिक्षकों ने भाग लेकर आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के गुर सीखे।

         इन शिक्षकों ने किया जिले का प्रतिनिधित्व



राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन में संपन्न हुए इस प्रशिक्षण में धमतरी जिले से मनोज कुमार पटेल (नगरी) राम नारायण साहू (कुरूद) श्रीमती हितेश साहू (धमतरी) श्रीमती शकुन्तला कंवर (मगरलोड) श्रीमती सुषमा अडिल (नगरी) ने सहभागिता की:

आधुनिक पद्धतियों और डिजिटल टूल्स पर जोर

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को सक्रिय अधिगम (Active Learning), गतिविधि-आधारित शिक्षण और विद्यार्थी केंद्रित शिक्षाशास्त्र जैसी आधुनिक अवधारणाओं से अवगत कराया गया। कार्यक्रम की मुख्य बातें इस प्रकार रहीं:

नवाचारी पद्धतियाँ: विज्ञान को तथ्यों के संग्रह के बजाय एक सतत प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करने पर बल दिया गया। NGSS-2013: 'नेक्स्ट जनरेशन साइंस स्टैंडर्ड्स' की संकल्पना और कक्षा-स्तर पर इसके उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई।

कठिन विषयों का सरलीकरण: गणित में क्षेत्रफल, आयतन और तार्किक चिंतन को दैनिक जीवन के उदाहरणों से जोड़ना सिखाया गया। वहीं विज्ञान में ध्वनि, प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण और तरंगदैर्घ्य जैसे जटिल विषयों को प्रयोगों के माध्यम से समझाया गया।

डिजिटल शिक्षा: शिक्षकों को शैक्षणिक ऐप्स और कम लागत वाली शिक्षण अधिगम सामग्री (TLM) के निर्माण का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

अधिकारियों ने दी बधाई

यह प्रशिक्षण राज्य स्तर से आयुक्त श्रीमती किरण कौशल (आई.ए.एस.), उपसंचालक ए.के. सारस्वत और सहायक संचालक श्रीमती मंजुलता साहू के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। शिक्षकों की इस उपलब्धि पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी के.आर. साहू, विकासखंड स्रोत समन्वयक प्रकाश चन्द्र साहू एवं अन्य शिक्षाविदों ने हर्ष व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

प्रशिक्षण से लौटे शिक्षकों का मानना है कि इससे कक्षा शिक्षण अधिक रोचक और व्यावहारिक बनेगा, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास सुनिश्चित होगा।


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