खेत में मिला तेंदुए का शावक, ग्रामीणों में हड़कंप
वन विभाग ने तत्परता दिखाकर कराया सुरक्षित रेस्क्यू
उत्तम साहू
नगरी–सिहावा वनांचल क्षेत्र में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब खेतों के बीच एक तेंदुए का शावक देखा गया। अचानक सामने आए इस नज़ारे से ग्रामीणों में दहशत फैल गई और देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हुई और शावक को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल सफारी, नया रायपुर भेजा गया।
घटना बिरगुड़ी वन परिक्षेत्र के छिपली पारा गांव की है। बताया जा रहा है कि करीब 5–6 माह का तेंदुए का शावक श्रृंगी ऋषि पहाड़ी के नीचे स्थित जंगल से भटककर राजस्व क्षेत्र में आ गया था। खेतों में शावक की मौजूदगी से ग्रामीण सहम गए और तत्काल वन विभाग को इसकी जानकारी दी।
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर लोगों को सतर्क किया और शावक से दूरी बनाए रखने की अपील की। सावधानीपूर्वक उसे कब्जे में लेकर पशु चिकित्सालय नगरी ले जाया गया, जहां उसका प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच में शावक पूरी तरह स्वस्थ पाया गया, हालांकि उसका शरीर पानी से भीगा हुआ था, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि वह किसी नाले या जलस्रोत के रास्ते भटककर बाहर आ गया होगा।
वन परिक्षेत्र अधिकारी सुरेंद्र कुमार अजय ने बताया कि तेंदुए का शावक स्वस्थ है और फिलहाल जंगल सफारी, नया रायपुर में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है। आगे की स्थिति को देखते हुए उसके पुनर्वास को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
गौरतलब है कि सिहावा–नगरी क्षेत्र घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जो तेंदुआ, भालू जैसे वन्यप्राणियों का प्राकृतिक आवास माना जाता है। ऐसे में जंगली जानवरों का रिहायशी इलाकों की ओर आना कोई नई बात नहीं है। हाल ही में कोटरी–सांकरा क्षेत्र में भी एक वन्यप्राणी स्कूल की बाउंड्री में लगे तार में फंस गया था।
गर्मी की शुरुआत के साथ ही इस तरह की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों में पानी की कमी के कारण वन्यप्राणी भोजन और पानी की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर आ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग जंगल क्षेत्रों में पानी की पर्याप्त व्यवस्था करे, ताकि जंगली जानवर गांवों और खेतों की ओर न भटकें। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में वन विभाग इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाता है।

