डूमरकछार चौक पर शराब का जहर, बाहरी हाथों से आदिवासी समाज हो रहा बर्बाद

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 डूमरकछार चौक पर शराब का जहर, बाहरी हाथों से आदिवासी समाज हो रहा बर्बाद


                ‌‌पाली से ज्ञान शंकर तिवारी

पाली। डूमरकछार चौक एवं इसके आसपास का इलाका इन दिनों एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक संकट की चपेट में है। उत्तर प्रदेश से आकर बसे एक परिवार द्वारा खुलेआम अवैध शराब की बिक्री की जा रही है, जिसका सीधा और घातक प्रभाव बहुलता वाले आदिवासी गांव डूमर कछार के ग्रामीणों, विशेषकर बच्चों और युवाओं पर पड़ रहा है। नशे की गिरफ्त में फंसता युवा वर्ग आज पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग के ओवरब्रिज के नीचे और सड़क किनारे शराब भट्टी से लाकर अवैध रूप से शराब बेची जा रही है। यह कारोबार इतने खुले तौर पर संचालित हो रहा है कि गांव की महिलाएं और बच्चे भी रोज़ इस सामाजिक बुराई को अपनी आंखों से देखने को मजबूर हैं। इससे आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित परिवार ने न केवल अवैध शराब का नेटवर्क खड़ा किया है, बल्कि सरकारी भूमि पर बेजा कब्जा कर मकान भी बना लिया है। विरोध करने पर आदिवासी ग्रामीणों से बहस, डराने-धमकाने और दबंगई की जाती है। पुलिस और आबकारी विभाग के नाम पर अवैध वसूली की चर्चाएं भी गांव में आम हैं, जिससे प्रशासनिक संरक्षण की आशंका गहराती जा रही है।

आदिवासी हितैषी होने का दावा करने वाली सरकार और प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अवैध कारोबार भविष्य में बड़े सामाजिक टकराव का कारण बन सकता है। अब आवश्यक है कि प्रशासन तत्काल संज्ञान लेकर अवैध कब्जे और शराब कारोबार पर कठोर कदम उठाए, ताकि आदिवासी समाज को भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

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