पीएम श्री स्कूल में उबाल: विवादित प्राचार्य की वापसी पर भड़के छात्र, कलेक्टोरेट घेराव के बाद प्रशासन ने लिया यू-टर्न
गरियाबंद। पीएम श्री योजना के तहत संचालित स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल उस वक्त रणभूमि में बदल गया, जब निलंबित रह चुकी प्राचार्य की दोबारा उसी विद्यालय में पदस्थापना कर दी गई। इस फैसले के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और सैकड़ों छात्र “प्राचार्य हटाओ” के नारों के साथ सीधे कलेक्टोरेट जा पहुंचे।
करीब 400 छात्र हाथों में तख्तियां लेकर कलेक्टोरेट के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। छात्रों का साफ कहना था—जिस प्राचार्य पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लग चुके हों, उनकी उसी स्कूल में वापसी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।
छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप
छात्रों द्वारा सौंपे गए हस्तलिखित ज्ञापन में प्राचार्य वंदना पाण्डेय पर
- मानसिक प्रताड़ना
- प्रवेश के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूली
- प्रैक्टिकल में मनमानी नंबर कटौती
- अनावश्यक बैठकों से पढ़ाई बाधित करने
जैसे गंभीर आरोप दर्ज थे।
प्रशासन हरकत में, आदेश तुरंत निरस्त
हालात की गंभीरता को देखते हुए एडीएम पंकज डहारे खुद छात्रों से बातचीत करने पहुंचे। उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर 2–3 दिनों में निर्णय लिया जाएगा। साथ ही यह भी स्वीकार किया कि यदि जिला शिक्षा अधिकारी समय रहते जानकारी देते, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
छात्रों के दबाव और माहौल को भांपते हुए प्रशासन ने विवादित बहाली आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया, जिससे आंदोलन कर रहे छात्रों में आंशिक संतोष देखने को मिला।
निलंबन, बहाली और नियमों की अनदेखी
गौरतलब है कि
- 17 अक्टूबर 2025 को स्कूल शिक्षा विभाग ने प्राचार्य को निलंबित किया था
- कारण था 31 जनवरी 2025 को शिक्षा सचिव के औचक निरीक्षण में पाई गई गंभीर अनियमितताएं
- हैरानी की बात यह रही कि 10 महीने बाद कार्रवाई हुई और फिर सिर्फ 5 महीने में प्रशासनिक आवश्यकता बताकर बहाली कर दी गई
जबकि सरकारी नियम स्पष्ट हैं कि निलंबित अधिकारी को उसी संस्थान और उसी पद पर बहाल नहीं किया जा सकता।
स्टाफ भी नाराज़, पहले ही दी थी चेतावनी
5 फरवरी को स्कूल के 28 कर्मचारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर प्राचार्य को अन्यत्र पदस्थ करने की मांग की थी, लेकिन पांच दिनों तक कोई सुनवाई नहीं हुई। नतीजतन, छात्रों को खुद मोर्चा खोलना पड़ा।
पहले से दो गुटों में बंटा था स्कूल
स्कूल का माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था। एक दिन पहले स्टाफ के दो वायरल वीडियो भी चर्चा में रहे थे। हालांकि संबंधित शिक्षकों का कहना था कि वीडियो कार्यक्रम समाप्ति के बाद बनाए गए, लेकिन इसे दुर्भावनापूर्ण तरीके से प्राचार्य द्वारा वायरल कराए जाने का आरोप लगाया गया।
यह मामला सिर्फ एक बहाली का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, नियमों की पालना और छात्रों की आवाज़ का प्रतीक बन गया है। छात्रों के एकजुट विरोध ने यह साबित कर दिया कि अब वे चुप रहने वाले नहीं हैं।

