उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व में एसडीओ की सरकारी गाड़ी से लकड़ी परिवहन का मामला

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 उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व में एसडीओ की सरकारी गाड़ी से लकड़ी परिवहन का मामला

प्रतिबंधित रात्रिकालीन समय में बिना अनुमति निकाली गई लकड़ी



उत्तम साहू नगरी 

धमतरी/गरियाबंद- उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व में वन कानूनों की गंभीर अनदेखी का मामला सामने आया है। आरोप है कि टाइगर रिज़र्व जैसे अति संवेदनशील क्षेत्र से लकड़ी का परिवहन बिना किसी वैध अनुमति के किया गया, वह भी वन विभाग के एसडीओ की सरकारी गाड़ी से। वन अधिनियम व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की खुली अवहेलना, सरकारी गाड़ी, प्रतिबंधित समय,और  वाहन चालक एसडीओ का बेटा ! जब पहरेदार ही बन जाएँ ‘रॉयल तस्कर तब एसडीओ की भूमिका पर उठता है गंभीर सवाल? जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है।

रात में परिवहन, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी

गौरतलब है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट एवं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के निर्देशानुसार टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक आवागमन पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बावजूद रात्रिकालीन समय में लकड़ी का परिवहन किया जाना न्यायालय के आदेशों की अवहेलना माना जा रहा है। 

प्राथमिक जानकारी के अनुसार मामले में निम्न कानूनी धाराओं के उल्लंघन की स्थिति बनती है

भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26 व 41

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 27 व 29

भारतीय दंड संहिता की धारा 188

सरकारी वाहन के दुरुपयोग पर मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधान

पद का दुरुपयोग सिद्ध होने पर IPC धारा 409 की संभावना

वाहन जब्ती पर बड़ा सवाल

कानून के अनुसार अपराध में प्रयुक्त वाहन की जब्ती का प्रावधान है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस मामले में सरकारी जिप्सी को भी ज़ब्त किया जाएगा, या फिर कार्रवाई केवल आम नागरिकों तक ही सीमित रहेगी?

वन विभाग की चुप्पी, सवालों की बौछार

इस पूरे मामले पर अब तक वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विभागीय चुप्पी ने चयनात्मक कार्रवाई और कानून के दोहरे मापदंड को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच की मांग तेज

पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने तत्काल एफआईआर, स्वतंत्र जांच, सरकारी वाहन की जब्ती,और दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की मांग की है।

संरक्षण व्यवस्था पर संकट

उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व राज्य की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है। यदि यहां भी नियमों का पालन पद और पहचान देखकर किया जाएगा, तो वन्यजीव संरक्षण की पूरी व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।  मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

इस घटनाक्रम को लेकर उपनिदेशक वरूण जैन से जानकारी लेने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।




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