40 वर्षों की समर्पित सेवा के बाद प्रधान पाठक प्रेमशंकर तिवारी को भावभीनी विदाई

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40 वर्षों की समर्पित सेवा के बाद प्रधान पाठक प्रेमशंकर तिवारी को भावभीनी विदाई




हरदी बाजार (कटघोरा विकासखंड)। प्राथमिक शाला चैनपुर बसाहट के प्रधान पाठक श्री प्रेमशंकर तिवारी को 40 वर्षों की दीर्घ एवं समर्पित सेवा के उपरांत सेवानिवृत्ति पर भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर विद्यालय परिवार, छात्र-छात्राओं एवं ग्रामवासियों ने नम आंखों से उन्हें विदा करते हुए उनके योगदान को याद किया।

श्री तिवारी की प्रथम नियुक्ति 9 जुलाई 1986 को प्राथमिक शाला सलोरा (ख) में हुई थी, जहां उन्होंने पांच वर्षों तक सेवाएं दीं। इसके बाद वर्ष 1992 से 2010 तक उन्होंने प्राथमिक शाला पोड़ी में अपनी सेवाएं दीं। इसी दौरान उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए उन्हें प्रधान पाठक पद पर पदोन्नत किया गया। 29 अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2026 तक उन्होंने प्राथमिक शाला चैनपुर बसाहट में प्रधान पाठक के रूप में कार्य करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।

सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में प्रधान पाठक अनिल कौशिक ने श्री तिवारी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सदैव शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य किया। इस दौरान शिक्षिका दिव्या तिवारी, सलोमी मार्ग्रेट गुहा, स्वर्ण लता कौशिक, प्रयाग सिंह कंवर, सूर्य भूषण पैकरा एवं शशि राठौर ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए उनके 16 वर्षों के कार्यकाल को यादगार बताया।

कार्यक्रम में विद्यालय परिवार एवं ग्रामवासियों द्वारा शाल, श्रीफल, माला और बुके भेंट कर उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर शाला प्रबंध समिति की अध्यक्ष लोकेश्वरी बाई, ग्राम के वरिष्ठजन बाबूलाल जी, जगदीश प्रसाद जायसवाल, श्रीमती लक्ष्मीन भट, सीता बाई, कनक लता कश्यप, फिरतीन बाई सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

विद्यालय से विदाई के पश्चात जब श्री तिवारी अपने गृह ग्राम नूनेरा पहुंचे, तो वहां उनका भव्य स्वागत किया गया। ग्रामवासियों ने आतिशबाजी और बाजे-गाजे के साथ उनका अभिनंदन करते हुए उन्हें घर तक लेकर गए। इस दौरान बड़ों ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद दिया, वहीं छोटे बच्चों ने दीप प्रज्वलित कर आरती उतारी। घर पहुंचने पर उन्होंने सर्वप्रथम अपने माता-पिता एवं बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया।

इस तरह एक समर्पित शिक्षक के रूप में श्री प्रेमशंकर तिवारी की सेवाएं भले ही औपचारिक रूप से समाप्त हो गई हों, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

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