रायपुर.मौत का टैंक बना अस्पताल: 50 फीट नीचे उतरे तीन युवक, जिंदा बाहर नहीं आ सके
सुरक्षा के नाम पर सिर्फ मास्क, दम घुटने से दर्दनाक अंत – अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल
रायपुर। राजधानी का नामी रामकृष्ण केयर अस्पताल बुधवार को एक दर्दनाक हादसे का गवाह बन गया, जहां सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन युवकों की जान चली गई। टिकरापारा थाना क्षेत्र में हुए इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।
बताया जा रहा है कि करीब 50 फीट गहरे सेप्टिक टैंक में तीन मजदूर—गोविंद सेंद्रे, अनमोल मचकन और प्रशांत कुमार—को सफाई के लिए उतारा गया था। लेकिन अंदर जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी ने कुछ ही मिनटों में उनकी सांसें छीन लीं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने खतरनाक काम के लिए उन्हें कोई ठोस सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए थे—सिर्फ एक साधारण मास्क के भरोसे उन्हें मौत के मुंह में उतार दिया गया।
चीखों से गूंजा अस्पताल परिसर
जैसे ही हादसे की खबर मिली, तीनों युवकों के परिजन मौके पर पहुंच गए। अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और मातम का माहौल बन गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में जमा हो गए।
पुलिस और जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यह सवाल अब खड़ा हो रहा है कि—
👉 क्या बिना सुरक्षा इंतजाम के मजदूरों को टैंक में उतारना लापरवाही नहीं?
👉 क्या यह सीधा-सीधा आपराधिक कृत्य है?
जिम्मेदार कौन?
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर से यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक मजदूरों की जान इस तरह जोखिम में डाली जाती रहेगी?

