दुगली में तेंदुपत्ता शाखकर्तन पर सफल कार्यशाला, जंगल संरक्षण पर जोर

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 दुगली में तेंदुपत्ता शाखकर्तन पर सफल कार्यशाला, जंगल संरक्षण पर जोर


                       

                  उत्तम साहू 2 फरवरी 2026

दुगली (धमतरी), 2 मार्च 2026 आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत दुगली में तेंदुपत्ता शाखकर्तन संबंधी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को तेंदुपत्ता पौधों का वैज्ञानिक एवं उचित शाखकर्तन सिखाना था, ताकि तोड़ाई के समय उच्च गुणवत्ता वाले पत्ते प्राप्त हों और वनों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित हो सके। विशेषज्ञों ने वनों में उपलब्ध आयुर्वेदिक औषधियों की उपयोगी जानकारी भी साझा की, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होगी।



कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि आदिवासी समाज की असली पहचान जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है। "यह समाज हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखे हुए है। वनों से इमली, सरई, महुआ जैसी वन उपजों के अलावा विभिन्न आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का संग्रह कर आर्थिक सशक्तिकरण संभव है।" उन्होंने प्रत्येक गांव में सूचना माध्यमों, टीवी और जागरूकता अभियानों के जरिए जंगल संरक्षण की जानकारी फैलाने पर बल दिया। साथ ही, वनों को आग से बचाने की भावुक अपील की, क्योंकि "जंगल हमारी महत्वपूर्ण आर्थिक संपदा हैं।"



कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि यदि वनों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए, तो तेंदुपत्ता सहित अन्य लघु वनोपज ग्रामीणों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। साथ ही, जंगलों को आग और अवैध कटाई से बचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

कार्यक्रम में सिहावा विधायक अम्बिका मरकाम, प्रकाश बैस, पिंकी शिवराज शाह, पूर्व विधायक श्रवण मरकाम जैसे प्रमुख नेता उपस्थित रहे। अध्यक्षता जिला वनोपज सहकारी समिति यूनियन धमतरी के अध्यक्ष सोमनाथ सोम ने की।

इसके अलावा डीएफओ श्री कृष्ण जाधव, भाजपा उपाध्यक्ष अकबर कश्यप, वन स्थायी समिति सभापति एवं जनपद सदस्य राजेश नाथ गोसाई, अजजा मोर्चा जिलाध्यक्ष मोहन पुजारी, कांग्रेस उपाध्यक्ष भानेंद्र ठाकुर, चंद्राकला साहू, कलावती नेताम, सरपंच रामेश्वर मरकाम, हीरामन ध्रुव, बसीन बाई सहित वन विभाग के कर्मचारी एवं प्रबंधक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यशाला ने न केवल तकनीकी ज्ञान प्रदान किया, बल्कि जंगल संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को भी मजबूत किया।


दुगली की यह पहल केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि “जंगल बचाओ–जीवन संवारो” अभियान की मजबूत शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।

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