अधूरे सिलेबस के बीच परीक्षा देने को मजबूर छात्र, नगरी के पीएम श्री स्कूल में पढ़ाई पर उठे सवाल

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अधूरे सिलेबस के बीच परीक्षा देने को मजबूर छात्र, नगरी के पीएम श्री स्कूल में पढ़ाई पर उठे सवाल

कक्षा 6वीं में 5 यूनिट में सिर्फ 1 पूरी, कई विषयों का आधा-अधूरा पाठ्यक्रम; पालकों में नाराजगी, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग



उत्तम साहू 

 नगरी (धमतरी): विकासखंड नगरी स्थित शासकीय श्रृंगी ऋषि एक्सीलेंस इंग्लिश मीडियम स्कूल (पीएम श्री स्कूल) में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां कई कक्षाओं में पाठ्यक्रम अधूरा होने के बावजूद परीक्षाएं नजदीक हैं, जिससे छात्र-छात्राओं और पालकों की चिंता बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार, कक्षा 6वीं में अंग्रेजी विषय में 10 मार्च तक 5 यूनिट में से केवल 1 यूनिट ही पढ़ाई गई है, जबकि पुस्तक में कुल 12 पाठ शामिल हैं। इसी तरह कक्षा 7वीं में हिंदी के 3 पाठ शेष हैं, जबकि अंग्रेजी में 17 में से केवल 7 पाठ ही पूरे किए गए हैं। भूगोल विषय का पाठ्यक्रम भी अधूरा बताया जा रहा है।
वहीं, कक्षा 8वीं में अंग्रेजी का लगभग 50 प्रतिशत कोर्स ही पूरा हो पाया है

हैरानी की बात यह है कि विद्यालय में 25 से 30 शिक्षकों का स्टाफ मौजूद होने के बावजूद पढ़ाई संतोषजनक नहीं हो पाई। अब जबकि बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं और अन्य कक्षाओं की परीक्षाएं अगले 10-12 दिनों में प्रस्तावित हैं, विद्यार्थियों के सामने तैयारी का संकट खड़ा हो गया है।

नगरी एवं आसपास के 20 से 40 किलोमीटर दूर ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में छात्र इस विद्यालय में अध्ययन के लिए आते हैं। कई छात्र छात्रावास में रहकर पढ़ाई करते हैं, जबकि कुछ किराए या रिश्तेदारों के यहां रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे में अधूरी पढ़ाई ने पालकों की चिंता और बढ़ा दी है।

पालकों का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार फरवरी तक पाठ्यक्रम पूर्ण कर पुनरावृत्ति कराई जानी थी, लेकिन विद्यालय स्तर पर इसका पालन नहीं किया गया। इस संबंध में कई बार शिकायत और चर्चा के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

इस मामले में प्रभारी प्राचार्य एम.एस. प्रजापति ने बताया कि लगभग 50 प्रतिशत पाठ्यक्रम पूरा कराया गया है और शेष को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने भी संस्था प्रमुख से मिली जानकारी के आधार पर लगभग आधा सिलेबस पूरा होने की पुष्टि की है।

अब सवाल यह है कि अधूरी तैयारी के बीच परीक्षा देना छात्रों के साथ न्याय है या नहीं, और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी।

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